भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा चुनाव के लिए शनिवार को उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की। भाजपा की सूची का सभी को बेसब्री से इंतजार था। वहीं, सभी पार्टियां एक-एक सीट को लेकर समीकरण बैठाने में लगी हुई हैं।
भाजपा ने मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा सांसद को फिर से टिकट देने की घोषणा की है। मिश्रिख सीट से मौजूदा सांसद अशोक रावत को प्रत्याशी घोषित किया गया है। अशोक कुमार रावत वर्ष 2004 और 2009 में बसपा के टिकट पर मिश्रिख से सांसद चुने गए थे। वर्ष 2014 में भी वह बसपा के टिकट पर मिश्रिख से लड़े थे, लेकिन हार गए थे। वर्ष 2019 में वह भाजपा के टिकट पर मिश्रिख से लड़े और जीतने में कामयाब रहे।
मिश्रिख: चचेरे भाई के ससुर से होगा भाजपा प्रत्याशी का मुकाबला
मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से भाजपा और सपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब रिश्तों की अग्नि परीक्षा होगी। दरअसल भाजपा प्रत्याशी का मुकाबला मिश्रिख सीट पर उनके चचेरे भाई के ससुर से होगा। मिश्रिख से भाजपा ने मौजूदा सांसद अशोक रावत को फिर प्रत्याशी घाेषित किया है, जबकि सपा ने इस सीट से पूर्व मंत्री रामपाल राजवंशी को पहले से ही प्रत्याशी घोषित कर रखा है।
हरदोई जनपद की राजनीति में रिश्तों के बीच चुनावी मुकाबला पहले भी हो चुका है, लेकिन इस बार रिश्तों की रोचक लड़ाई मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र में है। मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र में हरदोई की तीन विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें बालामऊ, संडीला और बिलग्राम-मल्लावां हैं। इस संसदीय क्षेत्र में सीतापुर जनपद की मिश्रिख और कानपुर जनपद की बिल्हौर विधानसभा सीट भी है।
भाजपा प्रत्याशी अशोक रावत का मुकाबला रिश्ते में ससुर सपा प्रत्याशी रामपाल राजवंशी से है। दरअसल अशोक रावत के ताऊ के बेटे प्रभाष कुमार सांडी से भाजपा विधायक हैं। रामपाल राजवंशी भाजपा विधायक प्रभाष कुमार के ससुर हैं। रामपाल राजवंशी की बेटी निरमा देवी विधायक प्रभाष की पत्नी हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो इस सीट पर राजनीति के साथ रिश्तों का भी मुकाबला है।