विधानसभा चुनाव में भले ही बहुजन समाज पार्टी को प्रदेश में सिर्फ एक सीट पर जीत मिली हो, लेकिन परिणाम पर फर्क डालने की स्थिति में बसपा आज भी है। यही वजह है कि हरदोई संसदीय क्षेत्र से बसपा के प्रत्याशी के नाम का एलान होने का इंतजार सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं। किसी के लिए सकारात्मक तो किसी के लिए नकारात्मक प्रभाव बसपा प्रत्याशी का होगा, लेकिन बसपा की चुनाव में मौजूदगी अहम तो रहेगी ही।
यूं ताे अब तक हुए लोकसभा चुनाव में हरदोई लोकसभा क्षेत्र से बसपा को कभी कामयाबी नहीं मिली, लेकिन कई बार बसपा प्रत्याशी दूसरा स्थान हाासिल करने में कामयाब रहे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन था। इस गठबंधन के चलते हरदोई सीट सपा के कोटे में चली गई थी और बसपा का प्रत्याशी यहां मैदान में नहीं उतरा था। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे अंशुल वर्मा को मिली थी, लेकिन तब दूसरा स्थान बसपा के शिव प्रसाद वर्मा को मिला था।
अंशुल वर्मा काे 3,60,501 वोट मिले थे, जबकि शिव प्रसाद वर्मा को 2,79,158 वोट हासिल हुए थे। तत्कालीन सांसद ऊषा वर्मा उस चुनाव में 2,76,543 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रही थीं। अब होने वाले लोकसभा चुनावों में अकेले ही मैदान में उतरने का संकेत बसपा प्रमुख मायावती दे चुकी हैं।
ऐसे में सबकी निगाहें बसपा प्रत्याशी पर लगी हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मेवाराम वर्मा समेत कई पूर्व पदाधिकारी टिकट के दावेदार हैं। दूसरे दलों के लोगों से भी बसपा नेताओं की बात चल रही है। पूरे मामले पर बसपा जिलाध्यक्ष रणधीर बहादुर कहते हैं कि बसपा के कार्यकर्ता अनुशासित हैं। पार्टी की मुखिया मायावती जिसे भी प्रत्याशी घोषित करेंगी उसे सभी कार्यकर्ता एक जुट होकर चुनाव लड़ाएंगे। उनका दावा है कि टिकट के दावेदारों की लंबी लाइन है। पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया जाएगा।