परिवार के साथ पैदल गांव जाते गुजरात से लौटे प्रवासी मजदूर।
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कानपुर देहात। लॉकडाउन के चलते गैर प्रांतों में फंसे मजदूरों का पलायन जारी है। स्पेशल ट्रेनें चलाने व बसों के इंतजाम के सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। हाईवे पर ट्रकों, डंपरों से प्रवासी मजदूर जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं। जिले के कानपुर-इटावा व कानपुर-झांसी हाईवे पर यह नजारा आम है।
बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर जान जोखिम में डालकर ट्रकों, डंपर व ट्राला पर लदे सामान पर बैठकर घरों को लौट रहे हैं। कुछ ट्रक की केबिन के ऊपर बनी छत पर बैठकर लौट रहे हैं। इनमें से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व महाराष्ट्र से आने वाले प्रवासी मजदूर ज्यादा हैं। यह लोग गोरखपुर, बिहार जा रहे हैं। भाड़ा वाहनों पर लदे सामान या केबिन के ऊपर बनी छत पर बच्चे व महिलाओं के बैठने से हादसे का खतरा अधिक है।
गैर जिलों व प्रांतों को भाड़ा वाहनों पर बैठकर जा रहे इन लोगों की जांच भी नहीं की जा रही है। जिले की सीमा से बेरोकटोक गुजर रहे हैं। डीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि वाहनों पर बैठकर जा रहे लोगों को उतारने का निर्देश नहीं है।
अकबरपुर में मजदूरों को बस से उतारा
प्रवासी मजदूरों को घर तक भेजने के दावों की हकीकत इतर है। बस चालक भी मनमानी कर रहे हैं। हाईवे पर डींघ में छोड़ने के बजाय बस चालक ने गुजरात के भाव नगर से लौटे प्रवासी मजदूरों व उनके परिजनों को अकबरपुर में ही उतार दिया। बच्चों व महिलाओं को लेकर प्रवासी मजदूर पैदल की गांव की ओर रवाना हुए।
गुजरात के भावनगर में गोल गप्पे बेचने का काम करने भोगनीपुर के जगदीशपुर उमरिया से दस प्रवासी मजदूर पांच महिलाओं व दस बच्चों के साथ गए थे। लॉकडाउन में सभी गुजरात में फंसे थे। 10 मई को स्पेशल ट्रेन से प्रवासी मजदूर गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। इसके बाद वहां से बस से सभी को घर भेजा गया। बस में 48 कुल लोग थे। 25 लोगों को कानपुर-झांसी हाईवे पर डींघ में उतरना था। लखनऊ के रास्ते होकर बस लेकर आए चालक ने कानपुर-झांसी हाईवे की बजाय औरैया व इटावा जाने के लिए कानपुर-इटावा हाईवे पकड़ लिया। जगदीशपुर उमरियां के प्रवासी मजदूर व उनके परिवार को अकबरपुर ओवरब्रिज पर उतार कर बस चली गई।