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चिंताजनक: दुबले लोगों का भी लिवर फैटी, शोध में सामने आई बात, नए लक्षण के कारणों को जानने में जुटे विशेषज्ञ

Tue, 31 Jan 2023 11:38 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार की अगुवाई में विशेषज्ञों ने 60 रोगियों पर अध्ययन किया है। डॉ. कुमार का कहना है कि अभी तक इसके कारण पता नहीं चले हैं। जांचों में कुछ रोगियों की आंतों के बैक्टीरिया में भी बदलाव मिला है। नए तरह के लिवर रोग का नाम लीन नैश (नॉन अल्कोहलिक स्टेटिक हेपेटाइटिस) दिया गया है। जिन रोगियों का अध्ययन किया गया है उनका लिवर फैटी मिला है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमूमन यह कहा जाता है कि मोटापाग्रस्त होने पर व्यक्ति का लिवर फैटी हो जाता है। इसके साथ ही लिवर के कार्य करने संबंधी जांचें एसजीपीटी और एसजीओटी बढ़ी हुई आती हैं। लेकिन अब जो रोगी आ रहे हैं, वे दुबले-पतले हैं और उनके लिवर में वैसी ही खराबियां हैं जैसी मोटे लोगों में होती हैं। इस स्थिति ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है।

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उनका कहना है कि यह नए तरह का बदलाव लिवर में आ रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार की अगुवाई में विशेषज्ञों ने 60 रोगियों पर अध्ययन किया है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार का कहना है कि अभी तक इसके कारण पता नहीं चले हैं। जांचों में कुछ रोगियों की आंतों के बैक्टीरिया में भी बदलाव मिला है। नए तरह के लिवर रोग का नाम लीन नैश (नॉन अल्कोहलिक स्टेटिक हेपेटाइटिस) दिया गया है।

जिन रोगियों का अध्ययन किया गया है उनका लिवर फैटी मिला है। इसके साथ ही एसजीपीटी और एसजीओटी बढ़ी मिली। ये सभी दुबले-पतले थे। इस पर इनकी वायरस मार्कर जांच कराई गई तो सामान्य रिपोर्ट आई। अन्य जांचें भी सामान्य आई हैं। 30 फीसदी रोगियों का कोलेस्ट्रॉल कुछ बढ़ा हुआ था। इसके साथ ही इन रोगियों की आंतों के बैक्टीरिया की जांच की गई तो उनमें गट बैक्टीरिया बदला हुआ मिला। यह सामान्य लोगों की आंतों के बैक्टीरिया से कुछ अलग तरह का था। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार ने बताया कि यह नए तरह के लक्षण मिले हैं। अमूमन दुबले लोगों के शरीर में फैट कम होने से लिवर दुरुस्त रहता था, लेकिन अब दुबले लोगों को लिवर की समस्या आ रही है। इसका कोई कारण स्पष्ट नहीं है। 

केस : एक 
बिधनू के रहने वाले राजेंद्र कुमार (45) का वजन 52 किग्रा है। तोंद बिल्कुल नहीं है, लेकिन लिवर फैटी है। एसजीपीटी दो सौ और एसजीओटी 150 है। उनकी बाकी जांचें सामान्य हैं। उनका कहना है कि सादा खाना खाते हैं। शाकाहारी हैं। हैलट ओपीडी में जांच कराई। उन्हें लीन नैश श्रेणी में रखा गया है।

केस : दो 
जाजमऊ के निसार अहमद (35) का लिवर फैटी है। वजन 50 किलो है। बताते हैं कि मांसाहार कभी-कभार लेते हैं। तोंद बिल्कुल नहीं है, लेकिन गैस की शिकायत रहती है। वायरस मार्कर जांचें सामान्य हैं। लिपिड प्रोफाइल भी सामान्य है। उन्हें भी लीन नैश श्रेणी में शामिल किया गया है। 
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यह है शक
- सब्जियों, दालों में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवाओं का असर
- कोई नए तरह के वायरल संक्रमण का प्रभाव
- गंदे पानी से सब्जियां धोने से बैक्टीरियल संक्रमण
- खानपान का गलत तरीका
- जीन संबंधी कारक

ऐसे बच सकते हैं 
- खानपान में एहतियात बरतें, रेशेदार भोजन लें।
- जंक फूड से परहेज करें।
- वसायुक्त खाद्य पदार्थ न लें।
- नियमित व्यायाम करें।
- सब्जियां अच्छी तरह धोकर खाएं।
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