जिन रोगियों का अध्ययन किया गया है उनका लिवर फैटी मिला है। इसके साथ ही एसजीपीटी और एसजीओटी बढ़ी मिली। ये सभी दुबले-पतले थे। इस पर इनकी वायरस मार्कर जांच कराई गई तो सामान्य रिपोर्ट आई। अन्य जांचें भी सामान्य आई हैं। 30 फीसदी रोगियों का कोलेस्ट्रॉल कुछ बढ़ा हुआ था। इसके साथ ही इन रोगियों की आंतों के बैक्टीरिया की जांच की गई तो उनमें गट बैक्टीरिया बदला हुआ मिला। यह सामान्य लोगों की आंतों के बैक्टीरिया से कुछ अलग तरह का था। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार ने बताया कि यह नए तरह के लक्षण मिले हैं। अमूमन दुबले लोगों के शरीर में फैट कम होने से लिवर दुरुस्त रहता था, लेकिन अब दुबले लोगों को लिवर की समस्या आ रही है। इसका कोई कारण स्पष्ट नहीं है।
केस : एक
बिधनू के रहने वाले राजेंद्र कुमार (45) का वजन 52 किग्रा है। तोंद बिल्कुल नहीं है, लेकिन लिवर फैटी है। एसजीपीटी दो सौ और एसजीओटी 150 है। उनकी बाकी जांचें सामान्य हैं। उनका कहना है कि सादा खाना खाते हैं। शाकाहारी हैं। हैलट ओपीडी में जांच कराई। उन्हें लीन नैश श्रेणी में रखा गया है।
केस : दो
जाजमऊ के निसार अहमद (35) का लिवर फैटी है। वजन 50 किलो है। बताते हैं कि मांसाहार कभी-कभार लेते हैं। तोंद बिल्कुल नहीं है, लेकिन गैस की शिकायत रहती है। वायरस मार्कर जांचें सामान्य हैं। लिपिड प्रोफाइल भी सामान्य है। उन्हें भी लीन नैश श्रेणी में शामिल किया गया है।
यह है शक
- सब्जियों, दालों में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवाओं का असर
- कोई नए तरह के वायरल संक्रमण का प्रभाव
- गंदे पानी से सब्जियां धोने से बैक्टीरियल संक्रमण
- खानपान का गलत तरीका
- जीन संबंधी कारक
ऐसे बच सकते हैं
- खानपान में एहतियात बरतें, रेशेदार भोजन लें।
- जंक फूड से परहेज करें।
- वसायुक्त खाद्य पदार्थ न लें।
- नियमित व्यायाम करें।
- सब्जियां अच्छी तरह धोकर खाएं।