इंसुलिन रिसेंस्टेंस से और दिक्कत बढ़ जाती है
उन्होंने बताया कि डायबिटिक बालरोगियों के केस के अध्ययन से पता चला कि इनकी दवाओं की डोज जल्दी-जल्दी बढ़ती है। दो साल में इन्हें दो से तीन टेबलेट पर रखना पड़ता है। तीन साल में इंसुलिन पर रखने की नौबत आ जाती है। बच्चों की डायबिटीज के आक्रामक होने के कारण के संबंध में उन्होंने बताया कि रोगियों का आयु वर्ग 10 से 17 वर्ष के बीच का है। इसी उम्र में बच्चों में हारमोनल बदलाव होते हैं। इससे पैंक्रियाज को अधिक काम करना पड़ता है। इंसुलिन रिसेंस्टेंस से और दिक्कत बढ़ जाती है।
डायबिटिक बच्चों में बीपी, कोलेस्ट्राल भी बढ़ा
टाइप टू डायबिटीज के रोगियों का जांच में कोलेस्ट्राल और ट्राइग्लीसिराइड भी बढ़ी मिली है। इससे धमनियों के ब्लॉकेज होने का अंदेशा रहता है। ब्लॉकेज की वजह से कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. अनुराग वाजपेयी ने बताया कि इन रोगियों का लिवर फैटी पाया गया। डायबिटिक किशोरों को बड़ी उम्र के रोगियों की जैसी दवाएं चलानी पड़ती हैं।