इस जघन्य हत्याकांड के सभी आरोपियों को तत्कालीन थानाध्यक्ष संजय सिंह ने 27 फरवरी 2010 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तभी से आरोपी जेल में ही हैं। किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिली है। वहीं, अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हत्याकांड के पीछे मृतक जगदीश ने अपनी करीब सात बीघा जमीन का बैनामा आरोपी गौरीशंकर माली को किया था। जिस पर उसकी पत्नी बृजलता ने तहसीलदार के यहां आपत्ति लगा दी थी। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की थी।