कानपुर में कोरोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए शनिवार को जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक से विपक्ष के नेताओं के साथ अजीब खेल खेला गया। केडीए सभागार में हुई बैठक के लिए प्रशासन की तरफ से सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को भी प्रोटोकॉल के तहत पत्र भेजा गया।
लेकिन, सुबह सात बजे से ही विपक्ष के नेताओं के घर भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया। विपक्ष के नेताओं ने मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल होने के लिए पत्र मिलने की बात कही तो पुलिस ने दो टूक जवाब दिया कि आप लोग नहीं जा सकते।
अफसरों के दोहरे रवैये से आहत विपक्ष के विधायकों ने सरकार से सवाल किया है कि क्या सत्ता पक्ष के नेता ही जनप्रतिनिधि माने जाएंगे। विपक्ष के नेताओं को भी जनता ने चुना है। उनके क्षेत्र के भी कई ऐसे मसले थे, जिन्हें वह मुख्यमंत्री के सामने उठाना चाहते थे, लेकिन साजिशन उन्हें जाने ही नहीं दिया गया। सरकार ने प्रोटोकॉल भेजकर महज दिखावा किया है कि वह सभी जनप्रतिनिधियों के साथ एक जैसा व्यवहार करती है। वहीं पुलिस के जरिये घरों में नजरबंद कर अपनी निरंकुश छवि का भी परिचय दे दिया।
पत्र था दिखावा, एक दिन पहले हो गई थी तैयारी
मुख्यमंत्री की बैठक में किस जनप्रतिनिधि को शामिल होना है और किसे नहीं, शासन-प्रशासन ने इसकी तैयारी एक दिन पहले ही कर ली थी। विपक्ष के नेताओं को सिर्फ दिखावे के लिए बैठक में शामिल होने का पत्र भेजा गया था। अधिकारियों की सूची में 17 जनप्रतिनिधियों औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार, महापौर प्रमिला पांडे, सांसद सत्यदेव पचौरी, देवेंद्र सिंह भोले, अशोक रावत, एमएलसी अरुण पाठक, सलिल विश्नोई, विधायक महेश त्रिवेदी, सुरेंद्र मैथानी, अभिजीत सिंह सांगा, उपेंद्र पासवान, भगवती सागर के अलावा भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, उत्तर इकाई जिलाध्यक्ष सुनील बजाज, दक्षिण अध्यक्ष डॉ. वीना आर्या, नगर ग्रामीण इकाई अध्यक्ष कृष्णमुरारी शुक्ला के नाम शामिल थे।