दो बार पहले भी बना रिवाइवल प्लान, बंगले बेचने में हुआ था भ्रष्टाचार
मिल चलाने के लिए पहले भी दो बार रिवाइवल प्लान लाए गए थे। पहले प्लान में बीआईसी के बंगलों की बिक्री की गई। जिसे शहर के रईसों ने खरीदा था। इसमें बीआईसी अफसरों ने रईसों से मिलीभगत करके करोड़ों के बंगले कौड़ियों के दाम में बेचे थे। 27 बंगले महज 131 करोड़ रुपये में बेचे गए थे। मौजूदा समय में इनकी कीमत एक हजार करोड़ रुपये के आसपास है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई जांच कर रही है। इसके बाद जून 2011 में दूसरा प्रस्ताव लाया गया, जो कागजों तक सीमित रहा। बाद में 2012 से लाल इमली में उत्पादन बंद कर दिया गया। 2017 में नीति आयोग भी इसे बंद करने की सिफारिश कर चुका है।
बीआईसी की सहायक कंपनी कानपुर टेक्सटाइल, एल्गिन मिल हो चुकी हैं नीलाम
बीआईसी की सहायक कंपनी कानपुर टेक्सटाइल और एल्गिन मिल की चल संपत्तियां सालों पहले नीलाम हो चुकी हैं। मिलें चलाने के लिए 1984 में अलग-अलग बैंकों से 40 लाख रुपये का लोन लिया गया था। अफसरों की मनमानी के चलते बैंक लोन बढ़कर 29 करोड़ हो गया। बाद में कोर्ट के आदेश पर कोटक महिंद्रा बैंक को लिक्विडेटर बनाया गया था। लिक्विडेटर ने कब्जे खाली कराने के साथ ही दोनों मिलों की चल संपत्तियों को 15 करोड़ से ज्यादा में नीलाम कर दिया था।