कानपुर देहात। मैथा ब्लॉक के फंदा गांव में बुधवार को मृदा स्वास्थ्य पर गोष्ठी हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि सूक्ष्म तत्वों की कमी से फसलें कमजोर और रोगग्रस्त हो जाती हैं। इसका असर उत्पादन पर पड़ता है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग की ओर से फंदा गांव में कृषक गोष्ठी हुई।
प्रशिक्षण में गौण और सूक्ष्म पोषक तत्वों का मृदा स्वास्थ्य पर योगदान के बारे में किसानों को जागरूक किया गया। करीब 100 से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। विश्वविद्यालय के निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र विजय कुमार यादव ने बताया कि मिट्टी की जांच कराकर कमी वाले पोषक तत्वों की भरपाई की जा सकती है। बताया कि 17 पोषक तत्व होते हैं। इसमें गौण तत्व कैल्सियम, मैग्नीशियम व सल्फर हैं। जबकि सूक्ष्म पोषक तत्व जिं, आयरन, बोरॉन, जस्ता आदि हैं। ये तत्व मिट्टी की संरचना सुधारते हैं।
सूक्ष्मजीव की गतिविधि बढ़ाते हैं और प्रकाश संश्लेषण व एंजाइम सक्रियता के जरिये उत्पादन में सुधार के कारक बनते हैं। इन तत्वों की कमी से उत्पादन में गिरावट होती है और इसका नुकसान किसानों का उठाना पड़ता है। मृदा विज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. सर्वेश कुमार ने कहा कि मिट्टी की जांच जरूर कराई जानी चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर के प्रभारी डॉ. अजय कुमार सिंह व मृदा विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र कुमार ने भी पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी। हरी खाद के महत्व के बारे में भी बताया गया। यहां डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. खलील खान, डॉ. निमिशा अवस्थी, डॉ. शशिकांत आदि रहे।