रचिता ने प्रभात के साथ साझे में किस्तों पर स्कूटी ली थी। परिजनों के मुताबिक वह किसी से मतलब नहीं रखती थी। न जाने आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई, जिससे उसे ये कदम उठाना पड़ा। परिवार वाले किसी भी हालत में ये मानने को तैयार नहीं कि रचिता ने ये काम किया है।
स्कूटी की किस्त भी का समय हो चुका था। भाई बहन की फीस भेजने के बाद रचिता के पास कुछ बचता नहीं था। प्रभात और रचिता लगभग रोज ही मिलते थे। एक दिन क्राइम का सीरियल देखकर दोनों की चर्चा हुई और ये तय किया गया कि कुशाग्र उनके पास सॉफ्ट टारगेट है। इससे उनकी आर्थिक तंगी दूर हो सकती है। पूरा प्लान बना लिया गया और रैकी की गई।
तय हुआ कि घर के बाहर के कमरे में किसी का आना जाना नहीं है तो वहीं कुशाग्र को बंधक बनाकर रखा जाएगा। सब कुछ तय होने के बाद रचिता ने कुशाग्र को गुंजन टाकीज के पास से लिया और उसकी स्कूटी से ही प्रभात के घर पहुंच गई। खुद तो दूसरी तरफ चली गई लेकिन कुशाग्र को प्रभात के पास बाहर के कमरे में ले गए थे। फिर वहीं पर उसकी हत्या कर दी। सीसीटीवी फुटेज में भी 35 मिनट कमरे के अंदर रहने की बात सामने आई है।
फोन पर रचिता लेती रही जानकारी
शाम चार बजे घर से कुशाग्र कोचिंग के लिए निकला था। जरीब चौकी चौराहे के पास प्रभात ने उसे बहाने से रोका और अपने घर ले गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो वह दूसरे घरों में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने भी गई। अब तक उसे हत्या की जानकारी हो चुकी थी। शाम से ही उसने कुशाग्र की मां सोनिया को कॉल कर उसकी लोकेशन लेनी शुरू कर दी थी।