कानपुर। किसी आरोपी को सिर्फ संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ अपर जिला जज नवम शेष बहादुर निषाद ने प्रेमिका की हत्या के आरोप में पांच साल से जेल में बंद बिधनू के दुर्जनपुर गांव निवासी कुलदीप मिश्रा को बरी कर दिया। वह पांच साल बाद छूटा है।
बिधनू के सहिया मोझा जंगल की झाड़ियों में 29 अक्तूबर 2019 को महिला का शव मिला था। ग्राम प्रधान मर्दान सिंह ने बिधनू थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शव की पहचान कुलदीप के साथ पत्नी की तरह रह रही सीमा सिंह के रूप में हुई थी। पुलिस ने बिधनू के दुर्जनपुर गांव निवासी कुलदीप मिश्रा के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। अभियोजन की ओर से मृतका की मां, भाई व बहन समेत 15 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। कुलदीप के अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि सीमा की शादी महेंद्र पाल सिंह से हुई थी लेकिन कुछ ही दिन में सीमा मायके वापस आ गई। महेंद्र के खिलाफ मुकदमे दाखिल किए थे। वहीं, कुलदीप का भी अपनी पत्नी से मुकदमा चल रहा था। मुकदमेबाजी के दौरान ही कुलदीप और सीमा की मुलाकात हुई जो प्रेम-संबंध में बदल गई। सीमा पत्नी की तरह कुलदीप के साथ रहने लगी और उसके ढाबे के कामकाज में हाथ बंटाने लगी। सीमा और महेंद्र का परिवार व कुलदीप एक ही गांव में रहते थे जिस कारण दोनों परिवारों की बदनामी हो रही थी। इसी के चलते सीमा की हत्या कर कुलदीप को मुकदमे में फंसा दिया गया। कुलदीप के खिलाफ ठोस सबूत न होने के आधार पर कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
विवेचना में कई खामियां
कोर्ट ने कहा विवेचक ने सीमा और कुलदीप के मोबाइल की सीडीआर व लोकेशन नहीं निकलवाई। कोई ऐसा गवाह नहीं है जिसने मौत से पहले आखिरी बार सीमा और कुलदीप को साथ देखा हो। आलाकत्ल चाकू बरामद किया लेकिन एफएसएल नहीं भेजा। शव और आलाकत्ल की बरामदगी के बीच तीन किमी का अंतर था जबकि पुलिस के गवाह ने कहा कि शव स्थल से आलाकत्ल बरामदगी स्थल दिखाई दे रहा था। कुलदीप ने ऑनर किलिंग का पक्ष रखा था जो मजबूत दिख रहा था। विवेचना की इन्हीं खामियों के चलते कुलदीप को दोषमुक्त करार दिया गया।