भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह यूं तो मूलरूप से मिर्जापुर के रहने वाले हैं लेकिन वर्षों पहले बड़े भाई की सरपरस्ती में पढ़ाई के लिए कालपी में ऐसे दाखिल हुए कि कुछ ही वर्षों में वह ‘मिर्जापुरी’ की जगह ‘जालौनी’ बन गए।
उरई में स्नातक की परीक्षा के साथ-साथ राजनीतिक ककहरा सीख कर वह सियासी परिदृश्य में कदम-दर-कदम आगे बढ़ते गए। मिर्जापुर जिले के मूल निवासी स्वतंत्र देव सिंह के बड़े भाई श्रीपत सिंह पुलिस विभाग में कार्यरत थे। वर्षों पहले उनकी पोस्टिंग कालपी थाने में हुई तो स्वतंत्र देव भी भाई के साथ कालपी आ गए और एमएसवी इंटर कालेज में पढ़ाई की।
परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद स्नातक की पढ़ाई उरई से की। इसी दौरान वे विद्यार्थी परिषद से जुड़े और संगठन का कामकाज भी देखने लगे। भाई श्रीपत तो ट्रांसफर के बाद जिला छोड़ गए पर स्वतंत्र देव यहीं के होकर रह गए। उन्होंने उरई स्थित तुलसीधाम में ही अपना घर भी बना लिया।
विद्यार्थी परिषद के बाद वह भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े व भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। इसके बाद भाजपा के प्रदेश महामंत्री बने। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में स्वतंत्र देव कालपी से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे।
परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह
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हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस की उमाकांति जीती थीं। 2017 में जब भाजपा की सरकार बनी तो उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें बिना चुनाव लड़े परिवहन मंत्री बनाया गया। इसके बाद वह विधान परिषद के सदस्य बनाए गए।
लोक सभा चुनाव में उन्हें मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। कांग्रेसी सत्ता वाले राज्य मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की सफलता ने स्वतंत्र देव का सियासी कद और बढ़ाया। सत्ता और संगठन के पर्याप्त अनुभव को देखते हुए ही उन्हें अब उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई है।