जीका वायरस को खत्म करने के लिए फॉगिंग
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जीका कानपुर में कहां से आया है? इसका पुख्ता सुबूत अभी स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिला है। हालांकि पहला संक्रमित एयरफोर्स स्टेशन में मिलने के कारण अंदाजा जरूर लगाया जा रहा कि केरल वाला संक्रमण यहां आ सकता है। वहां लोगों का आना-जाना लगा रहता है।
दरअसल, मच्छर जब संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो जीका वायरस मच्छर के पेट में आ जाता है। इसके बाद वही मच्छर जब किसी अन्य को काटता है तो वह भी संक्रमित हो जाता है। केरल से संक्रमण आने के शक पर स्वास्थ्य विभाग वहां से आने वाले लोगों की सूची तैयार कर रहा है।
इसके साथ राजस्थान आने-जाने वालों की भी सूची बनाई जा रही है। पोखरपुर समेत जिन क्षेत्रों के संक्रमित मिल रहे हैं, वहां के मच्छरों को पकड़कर सैंपल दिल्ली भेजे जा रहे हैं। अब कोशिश है कि जीका संक्रमण किसी भी हाल में मच्छर तक न पहुंचें, अगर मच्छर संक्रमित हुए तो रोगियों की संख्या बढ़ती जाएगी।
एडीज मच्छर का जीवन चक्र 10 दिन का होता है। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह ने बताया कि पहला संक्रमित मच्छर तो अब मर चुका होगा। यह कोशिश है कि मच्छर अब किसी संक्रमित को न काटने पाएं, नहीं तो वायरस उनमें आ जाएगा।
इससे संक्रमण फैलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। उन्होंने बताया कि संक्रमितों को आइसोलेट कर दिया गया है। उन्हें मच्छरदानी में रखा गया है। उनके आसपास के मच्छरों का सैंपल लिया जा रहा है। इससे पता चलेगा कि कितने मच्छर संक्रमित हुए हैं।