बांदा के गायत्री नगर में रह रहे पूर्व फौजी सूबेदार गुलाब सिंह कारगिल युद्ध के समय उड़ीसा में तैनात थे। उन्हें आपातकालीन स्थिति में कारगिल युद्ध में भेजा गया था। वे वर्ष 2013 में रिटायर हो चुके हैं।
कारगिल युद्ध में हर रोज मौत का सामना करने वाले गुलाब सिंह अब अपने बेटे प्रकाश सिंह को सेना को सौंपने की तैयारी में हैं। उसकी भर्ती प्रक्रिया चल रही है। वे कहते हैं कि सेना की वर्दी का रौब ही कुछ और है।
बेटा प्रकाश भी पिता इस हसरत को पूरा करने को तैयार है। गुलाब सिंह युद्ध के दिनों को याद कर बताते हैं कि दुश्मन से मोर्चा लेने का यह पहला मौका था।
जीत के बाद भी तमन्ना थी कि कुछ दिन और युद्ध चले ताकि दुश्मन दोबारा देश की ओर देखने के लायक न रहे। वे जोशीले अंदाज में कहते हैं कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा।