टीम ने बताया कि वह एंटी करप्शन टीम के लोग हैं। कानूनगो और सहयोगी को मऊदरवाजा थाने ले जाया गया। मुरहास जैतपुर निवासी अमर सिंह कुशवाह ने बताया कि उनके साढ़े 13 बीघा खेत की पैमाइश होनी थी। उन्होंने एक बार आदेश कराया तो उसे निरस्त कर दिया गया। दोबारा फिर पैमाइश का आदेश कराया, तो कानूनगो विवेक तिवारी ने उनसे 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी। परेशान होकर उन्होंने कानपुर में एंटी करप्शन ब्यूरो में संपर्क किया। वहां से 10 हजार रुपये लेकर टीम के साथ वह सदर तहसील पहुंचे। कमरे में बैठे सहयोगी उमाशंकर ने पहले रुपये गिने, फिर कानूनगो ने गिनकर रुपये जेब में रख लिए।
इसी दौरान पहुंचे टीम प्रभारी जटाशंकर, इंस्पेक्टर मृत्युंजय मिश्रा, चंद्रभान चौहान, दरोगा अर्चना शुक्ला, आशीष कुमार आदि ने रिश्वत लेते रंगे हाथों दोनों को दबोच लिया। इंस्पेक्टर मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि कानूनगो विवेक की जेब से एक एसडीएम का फर्जी आईकार्ड भी मिला है। उसने पूछताछ में बताया कि टोल आदि पर वह इसी कार्ड का प्रयोग करता था। वह मूल रूप से फतेहपुर के थाना सदर कोतवाली के मोहल्ला हरिहरगंज निवासी है। कानूनगो और सहयोगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
एक घंटे काम रहा प्रभावित, गिरफ्तारी की रही चर्चा
एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम की कार्रवाई होते ही कमरों में काम कर रहे कर्मचारी बाहर निकल आए। लेखपाल भी एकत्रित होकर अचानक गिरफ्तारी को लेकर काफी चौकन्ने दिखे। इसको लेकर एक घंटे तक सभी पटलों पर कामकाज प्रभावित रहा। हर पटल पर गिरफ्तारी की ही चर्चा होती रही।
सीट पर रिश्वत का खेल, जिम्मेदार अनजान
अभी तक काम के बदले दाम लेने का खेल तैनाती स्थल से दूर हटकर होता था, मगर सदर तहसील में पकड़ा गया कानूनगो अपनी सीट पर ही बैठकर रिश्वत लेता था। खुलेआम रिश्वत का खेल होने के बावजूद चंद कदम दूर दफ्तरों में बैठने वाले जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं थी। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम की कार्रवाई के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
बाल-बाल बचा एक लेखपाल
गरीब किसान से रिश्वत मांगने के खेल में एक लेखपाल भी शामिल था। वह कई बार पीड़ित से सेवा करने की बात कह चुका था। बताया जाता है कि बुधवार को जब कानूनगो को रिश्वत के 10 हजार रुपये दिए गए उससे कुछ देर पहले ही एक लेखपाल उनके कमरे से निकलकर बाहर गया था। गनीमत रही कि वह कमरे में नहीं मिला अन्यथा उसका भी जेल जाना तय था।
चार माह पहले हुई थी तैनाती, निलंबित
एसडीएम सदर गजराज सिंह ने बताया कि कानूनगो विवेक तिवारी ने करीब चार माह पहले ही यहां कार्यभार ग्रहण किया था। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रिश्वत लेते गिरफ्तार करने की सूचना मिली है। एडीएम सुभाष चंद्र प्रजापति ने बताया कि रिश्वत लेते पकड़े गए कानूनगो को निलंबित कर दिया गया है।