इनोवेशन में आईआईटी कानपुर देश में अव्वल
नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क-2023 में आईआईटी कानपुर को देश में पहला स्थान मिला है। इनोवेशन कैटेगिरी में आईआईटी कानपुर ने आईआईटी मद्रास, मुंबई, दिल्ली जैसे संस्थानों को पीछे छोड़ दिया। वहीं, पेटेंट की संख्या में भी इस साल इजाफा हुआ।
आईआईटी ने टाटा को 12 करोड़ में बेची तकनीक, अन्य भी आई मार्केट में
इस साल आईआईटी कानपुर ने अन्य संस्थानों के साथ मिलकर तैयार की 5जी रेडियो एक्सेस नेटवर्क तकनीक के लाइसेंस को टाटा समूह कह कंपनी तेजस नेटवर्क ने 12 करोड़ रुपये में बेच दिया है। इसके अलावा 1000 से अधिक आईपीआर फाइल हुए और 400 से अधिक को शासन ने स्वीकृति भी दी है। कुल पेटेंट का 13.76 फीसदी प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण भी हो चुका है।
विवि में शुरू हुआ कर्मकांड, ज्योतिर्विज्ञान का कोर्स
छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में 2023 में कई नए रोजगारपर कोर्सों की शुरुआत की गई। ड्रोन, कृषि तकनीक में जहां युवा छात्रों ने रुचि दिखाई तो कर्मकांड, ज्योतिर्विज्ञान के कोर्स में महिलाओं और बुजुर्गों ने रुचि दिखाई। इन कोर्सों की शुरुआत इसी साल विवि के दीनदयाल शोध केंद्र में हुई। एक साल के डिप्लोमा और छह महीने के सर्टिफिकेट कोर्स के लिए महिलाओं, सेवानिवृत्त, नौकरीपेशा लोगों ने रुचि दिखाई।
सीएसए में पहली बार ड्रोन से खेतों में छिड़काव
सीएसए में पहली बार खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए ड्रोन का सहारा लिया गया। वहीं विवि में छात्रों को ड्रोन में एक्सपर्ट बनाने के लिए लैब की स्थापना की गई। आईआईटी कानपुर देश का पहला संस्थान बना जिसने अनमैंड एयर व्हीकल सिस्टम इंजीनियरिंग और कॉग्निटिव सिस्टम पर एमटेक कोर्स तैयार किया है।
अटल आवासीय विद्यालय शुरू, निशुल्क पढ़ाए जा रहे श्रमिकों के बच्चे
बिल्हौर के रामपुर नरुआ में बना अटल आवासीय विद्यालय इस सत्र से शुरू हो गया। 14 एकड़ भूमि पर 58 करोड़ की लागत से बने इसे आवासीय विद्यालय में छात्रों के रहने और खाने की व्यवस्था निशुल्क है। इसमें श्रमिक परिवारों के बच्चे कक्षा छह से आठ तक निशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय का संचालन श्रम विभाग द्वारा किया जा रहा है। अपर श्रमायुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि छात्रों के दाखिले के लिए मंडल स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित कराई गई थी। इसमें मंडल से 80 बच्चों का चयन किया गया है। इनमें 40 छात्र और 40 छात्राएं शामिल हैं।
सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए आई गईं बेंच
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जिले के परिषदीय स्कूलों में पहले की अपेक्षा काफी बदलाव हुआ है। अब 55 फीसदी ज्यादा स्कूलों के छात्रों को सर्दी या गर्मी के मौसम में जमीन में बैठकर नहीं पढ़ना पड़ता है। इन स्कूलों में अब छात्रों के बैठने के लिए ड्युअल बेंच आ गई हैं। बीएसए सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि पहले जिले के 148 स्कूलों की हालत सबसे ज्यादा खराब थी। इनमें से 124 विद्यालयों में नगर निगम की ओर से 80 फीसदी से ज्यादा काम करा दिए गए हैं। 24 ऐसे विद्यालय हैं जिनके लिए नगर निगम ने दो करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।
स्वेटर-मोजे के लिए आ गई धनराशि
सर्दी शुरू होने से पहले ही स्वेटर और जूते मोजे खरीदने के लिए 1.60 बच्चों के अभिभावकों के खातों में 1200 रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से भेज दी गई है। वहीं, जिले के सभी स्कूलों में अब ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाई हो रही है। अधिकतर स्कूलों में शौचालय और पेयजल की व्यवस्था हो गई है।
प्लेसमेंट में गिरा आईआईटी का ग्राफ, अंतरराष्ट्रीय ऑफर भी घटे
आईआईटी कानपुर में इस साल प्लेसमेंट के ग्राफ में गिरावट देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय ऑफर भी बीते वर्षों की तुलना में कम रहे। संस्थान में कुल नौकरी के अलावा अंतरराष्ट्रीय ऑफर लगभग साढ़े तीन गुना घट गए। वर्ष 2022 में प्रथम चरण की प्लेसमेंट ड्राइव में 74 छात्रों को विदेशों में नौकरी का ऑफर मिला था, वहीं इस साल यह संख्या सिर्फ 22 है। पिछले वर्ष प्रथम चरण में 1128 छात्रों को नौकरी मिली थी, जो इस साल घटकर 913 रह गई है। इस साल संस्थान में कंपनियां तो काफी आईं, लेकिन अपने साथ ऑफर कम लाईं। वहीं, सीएसएजेएमयू, सीएसए, एचबीटीयू जैसे संस्थान में समय-समय पर प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया गया जिसमें प्लेसमेंट औसत रहा। एआईटीएच, यूपीपीटीटीआई जैसे संस्थानों में पैकेज औसत ही रहे।
एचबीटीयू में सीटें फुल तो यूपीटीटीआई में घटे दाखिले
पिछले कई वर्षों से दाखिलों की घटती संख्या से जूझ रहे एचबीटीयू में 2023 में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस साल एचबीटीयू की सभी 912 सीटों में भर गईं। वहीं, यूपीटीटीआई की स्थिति जस की तस रही। इस साल भी 212 सीटें थी पर मात्र 34 दाखिले ही हुए।
कई सरकारी स्कूलों का कायाकल्प बाकी
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जिले के परिषदीय स्कूलों में पहले की अपेक्षा काफी बदलाव हुआ है। हालांकि कई स्कूलों का कायाकल्प अभी भी होना बाकी है। इस साल किराये के जर्जर भवनों में संचालित 101 विद्यालयों को खाली कराकर नजदीक के दूसरे परिषदीय विद्यालयों में शिफ्ट करा दिया गया था। ऐसे में शिफ्ट किए गए विद्यालय में कमरे तो उतने ही रहे पर छात्र संख्या बढ़ गई। मॉडल स्कूल प्रेमनगर में इन दिनों एक साथ नौ विद्यालयों के छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय राजापुरवा में प्राथमिक विद्यालय कौशलपुरी (प्रथम) वाले स्कूल की कक्षाएं लग रहीं हैं।
48 स्कूलों की हालत सबसे ज्यादा खराब थी
प्राथमिक विद्यालय नारायणपुरवा में आसपास के तीन विद्यालयों को समायोजित करके किसी तरह पढ़ाई कराई जा रही है। साथ ही स्कूलों के समायोजन का सीधा असर छात्रों की उपस्थिति पर पड़ने लगा। दूरी बढ़ जाने के चलते बच्चों का स्कूल आना कम हो गया है। वहीं, जिले के लगभग 1800 परिषदीय स्कूलों में से एक हजार स्कूलों में ही बेंच की व्यवस्था हो सकी है। बीएसए सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि पहले जिले के 148 स्कूलों की हालत सबसे ज्यादा खराब थी। इनमें से 124 विद्यालयों में इस साल नगर निगम की ओर से 80 फीसदी से ज्यादा काम करा दिए गए हैं। 24 ऐसे विद्यालय हैं जिनके लिए नगर निगम ने दो करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।