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कानपुर: बिना इलाज 376 करोड़ के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी भवन में आ गई सीलन, ईएसआईसी का 300 बेड का अस्पताल भवन

Wed, 08 Dec 2021 12:52 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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ईएसआईसी हॉस्पिटल - फोटो : amar ujala
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कानपुर में ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) ने 376 करोड़ रुपये फूंककर पांडुनगर में 300 बेड का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भवन तो बना लिया पर यहां इलाज आजतक नहीं शुरू कर सका है। इससे पहले ही भवन की मरम्मत की भी नौबत आ गई है। इसमें कभी डेंटल कॉलेज तो कभी मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल संचालित करने की योजनाएं जरूर बनीं पर सहमति किसी पर नहीं बनी।
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भाजपा सांसद सत्यदेव पचौरी ने मंगलवार को लोकसभा के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को उठाया। कहा कि भवन अधूरा होने से हजारों कर्मचारियों और श्रमिकों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। पांडुनगर में यह भवन बने दो साल से ज्यादा समय हो गया। तमाम हवाई योजनाओं के बीच यहां 70 बेड का इस्तेमाल मरीजों को भर्ती करने के लिए हो रहा है।

यह मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू हो जाए तो 80 हजार कर्मचारियों और श्रमिकों को लाभ मिलेगा। दूसरे जिलों के ईएसआई कार्डधारक भी यहां इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल के नए भवन की दीवारों पर सीलन आने लगी है। इस बीमा अस्पताल को लेकर तैयार की गईं योजनाएं आखिर सफल क्यों नहीं हो पाईं? इस सवाल पर निदेशक श्रम सेवाएं प्रेम प्रकाश पाल ने बताया कि इस संबंध में ईएसआईसी को फैसला लेना है।
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इस वक्त अस्पताल का रेनोवेशन (नवीनीकरण) चल रहा है। इससे अस्पताल का एक तिहाई ही इस्तेमाल हो पा रहा है। ईएसआईसी के क्षेत्रीय निदेशक आरके कैम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि योजनाओं के संबंध में दिल्ली स्थित कारपोरेशन मुख्यालय में मंथन चल रहा है। वहां से कोई फैसला होगा तो निर्देश मिल जाएंगे। वहीं कुछ पूर्व अधिकारियों का कहना है कि इसे लेकर शुरू से ही गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिससे योजना फलीभूत नहीं हो पाई।
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जीएसवीएम की योजना भी हवाहवाई
पांडुनगर में बने इस भवन को लेने की जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की योजना भी हवाहवाई ही साबित हुई है। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार, कॉलेज प्रबंधन के अधिकारी अस्पताल परिसर का निरीक्षण करके इसे कॉलेज में शामिल करने की योजना बना चुके हैं। हालांकि, अभी हुआ कुछ नहीं। सबसे पहले पूर्व प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने योजना बनाई थी। उनके हटते ही योजना भी रद्दी की टोकरी में चली गई। अब फिर इस पर चर्चा शुरू हुई, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने अभी तक कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया है। 

संसद में बोले पचौरी, जल्द शुरू किया जाए अस्पताल
भाजपा सांसद सत्यदेव पचौरी ने मंगलवार को लोकसभा के शीतकालीन सत्र में कहा कि पांडुनगर में 300 बेड का नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भवन अधूरा पड़ा है। इसमें करीब 80 हजार कर्मचारियों और श्रमिकों को मिलने वाली इलाज की सुविधाएं ठप हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में 376 करोड़ रुपये की लागत से इसका शिलान्यास किया गया था।

यहां के लिए नए उपकरण भी आ गए हैं, लेकिन न तो भवन पूरी तरह से बन पाया है और न ही यहां पर कोई डॉक्टर तैनात है। पहले जो अस्पताल यहां संचालित होता था, उसे भी बंद कर दिया गया। वर्तमान में यहां सिर्फ ओपीडी चलती है। ऐसे में कानपुर नगर के साथ बुंदेलखंड के झांसी, हमीरपुर, फतेहपुर सहित आसपास के जिलों के गरीब तबके के लोगों को इलाज के लिए काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है।

सांसद ने बताया कि उन्होंने विभागीय मंत्री को पत्र के माध्यम से यहां की स्थिति की जानकारी दी है। सदन में उन्होंने मांग रखी कि अस्पताल के अधूरे कार्य को पूरा कर खरीदे गए उपकरणों का इस्तेमाल किया जाए। यहां पर लोगों के इलाज के लिए डॉक्टरों की तैनाती की भी मांग की है।
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