गेहूं की बुआई के लिए खेतों में नमी बनाकर रखें
डॉ. पांडेय के अनुसार ऐसी स्थिति में यदि गेहूं की बुआई की जाती है, तो वह पूरी तरह से अंकुरित नहीं होगा। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। गेहूं के अलावा मोटे अनाज पर भी इस मौसम का असर पड़ने की आशंका है। मोटे अनाज वाली फसलें भी इसी मौसम में बोई जाती है। विभाग की ओर से किसानों को सतर्क किया गया है कि गेहूं की बुआई के लिए खेतों में नमी बनाकर रखें। इससे बीज के अंकुरित होने में अधिक समय न लगे।
प्रदेश के सर्वाधिक गेहूं उत्पादन वाले जिलों में कानपुर भी
प्रदेश के 12 प्रमुख गेहूं उत्पादक जिलों में कानपुर, इटावा, फर्रुखाबाद और फतेहपुर भी शामिल है। मौसम और कृषि विशेषज्ञ डाॅ. एसएन पांडेय ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का असर कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में भी दिख रहा है। बताया कि पिछले वर्ष अक्तूबर के आखिरी सप्ताह में तापमान का औसत करीब दो डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। इसके अलावा गोरखपुर, मेरठ, बुलंदशहर, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद भी गेहूं के मुख्य उत्पादक हैं।