कानपुर में बाजार बंदी के नाम पर बवाल कराने की साजिश एक सप्ताह तक रची गई। उसके बाद अंजाम दिया गया। एसआईटी की शुरुआती जांच में यह तथ्य समाने आया है। वहीं दूसरी तरफ यह भी सामने आ रहा है कि कई पुलिसकर्मी हयात के करीबी रहे हैं। क्या हयात का किसी तरह का लाभ उनके जरिये मिला है।
नूपुर शर्मा ने 26 मई को विवादित बयान दिया था। बवाल तीन जून को हुआ। सूत्रों के मुताबिक बयान की जानकारी होने के तुरंत बाद से हयात एंड कंपनी ने बाजार बंदी की साजिश रचनी शुरू कर दी थी। बवाल वाले दिन हयात की कुछ पुलिसकर्मियों से बातचीत हुई थी। अब जांच में यह देखा जाएगा कि बातचीत क्यों हुई। यह भी हो सकता है कि संबंधित क्षेत्र के पुलिसकर्मियों ने उससे संपर्क कर बंदी को स्थगित करने की बात कही हो। अगर यह कारण नहीं निकला तो विस्तृत जांच की जाएगी।
रिमांड अर्जी पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
हयात व उसके साथ साजिश में शामिल रहे जावेद, राहिल व सूफियान को पुलिस ने रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। दस दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। बुधवार को कोर्ट ने अर्जी पर सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। गुरुवार को इस पर फैसला सुनाया जाएगा।