डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) अहमदाबाद जोन का तीन सदस्यीय जांच दल शनिवार को जेल में बंद इत्र कारोबारी पीयूष जैन के बयान दर्ज करेगा। पहले भी तीन दिन तक पीयूष से पूछताछ की गई थी, लेकिन वह सवालों के सीधे जवाब नहीं दे रहा था।
इसके चलते कोर्ट से दोबारा अनुमति ली गई है। डीजीजीआई की अर्जी पर कोर्ट ने पीयूष की रिमांड भी 18 फरवरी तक बढ़ा दी है। डीजीजीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक अंबरीष टंडन ने प्रभारी विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदिति जैन की अदालत में अर्जी दी। इसमें कहा कि पीयूष से जेल में पूछताछ की गई थी।
वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। मेसर्स ओडोचैम इंडस्ट्रीज में साझेदार अंबरीष जैन भी बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर नहीं हुए। पीयूष से यह जानना जरूरी है कि वह बिना जीएसटी भुगतान के किन लोगों को इत्र कंपाउंड और कच्चा माल सप्लाई करता था।
अर्जी देकर डीजीजीआई के वरिष्ठ जांच अधिकारी (एसआईओ) शंभूनाथ सिंह, अरुण त्रिवेदी व आईओ साजन कुमार भगत को जेल में पीयूष के बयान दर्ज करने व संबंधित कागजात, कंप्यूटर, प्रिंटर ले जाने की अनुमति मांगी। इस पर कोर्ट से अनुमति मिल गई।
वहीं रिमांड मजिस्ट्रेट गौरव द्विवेदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जेल से पीयूष की सुनवाई की। अधिवक्ता अंबरीष टंडन ने 14 दिन का रिमांड बढ़ाने की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
कन्नौज में पीयूष के लॉकर से नौ लाख और मिले
पीयूष जैन ने एसबीआई में जमा कुल रकम से 52 करोड़ रुपये जीएसटी के खाते में स्थानांतरित करने का कोई पत्र बैंक को नहीं दिया था। इस बात की तस्दीक बैंक ने कर दी है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान डीजीजीआई की टीम ने कोर्ट ने बैंक का वह पत्र भी दिखाया, जिससे पीयूष का वह झूठ बेनकाब हो गया।
जिसमें निचली अदालत में पहली बार रिमांड अर्जी पर सुनवाई के दौरान ही पीयूष ने टैक्स की रकम व पेनाल्टी के कुल 52 करोड़ रुपये बैंक को जीएसटी खाते में आरटीजीएस से स्थानांतरित करने की अनुमति देने की बात कही थी।
जांच अधिकारियों ने कोर्ट को यह भी बताया कि कन्नौज स्थित बैंक में पीयूष के लॉकर को उनकी पत्नी के सामने खोला गया, जिसमें से नौ लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।