फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कानपुर: एक मोबाइल से हजारों नंबर एक्टिव कर बेचता रहा गिरोह, फर्जीवाड़े के पीछे कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आई

Thu, 10 Feb 2022 12:43 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचने के मामले में अब टेलीकॉम कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। आरोपियों ने फर्जी आधार लगाकर छह-सात मोबाइल से 11 हजार से अधिक सिम एक्टिव कर बेच डाले। लेकिन टेलीकॉम कंपनी वीआई पूरा डाटा होने के बावजूद फर्जीवाड़े को नहीं पकड़ पाई।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर में प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचने के मामले में टेलीकॉम कंपनी की बड़ी लापरवाही है। गिरोह एक-एक मोबाइल से हजारों नंबर एक्टिव कर बेचता रहा और कंपनी बेखबर बनी रही। कंपनी जरा भी गंभीर होती तो इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो पाता। हालांकि कंपनी का फोकस तो इस बात पर होता है कि डिस्ट्रीब्यूटर अधिक से अधिक सिम बेचें। 
विज्ञापन

 

क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को गोविंदनगर निवासी दो भाइयों अभिषेक मिश्रा व हर्षित मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों ने कुछ ही महीने में 11 हजार से अधिक प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचे थे। इनमें आधार कार्ड फर्जी लगाए गए थे। सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी समेत अन्य अपराधों में किया जा रहा था।

 

आरोपी टेलीकॉम कंपनी वीआई (वोडाफोन-आइडिया) के डिस्ट्रीब्यूटर थे। पूरे फर्जीवाड़े के पीछे कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। क्योंकि छह-सात मोबाइल से इतनी बड़ी संख्या में सिम एक्टिव कर बेचने का घालमेल कंपनी को ही पकड़ना चाहिए था।

जानकार बताते हैं कि कंपनी के पास पूरा डाटा रहता है कि सिम कौन से मोबाइल में इस्तेमाल हो रहा है। आईएमईआई नंबर से ट्रेस होता है। इसके बावजूद कंपनी ने कार्रवाई नहीं की। 
 
कंपनी के रिकॉर्ड से ही खुला फर्जीवाड़ा 
क्राइम ब्रांच ने जब 20 हजार रुपये की साइबर ठगी की जांच की तो ठगों का केवल मोबाइल नंबर ही उपलब्ध था। लोकेशन राजस्थान में मिली। लेकिन उसमें आईडी कानपुर की लगी थी। जब क्राइम ब्रांच ने पता किया कि ये नंबर किस मोबाइल से एक्टिव हुआ तो वह आरोपियों का निकला।
 
इस मोबाइल की आईएमईआई नंबर का विवरण खंगाला तो पता चला कि इससे कई हजार सिम एक्टिव किए गए। तब आरोपी पकड़े गए और गिरोह का राजफाश हुआ। हैरानी की बात ये है कि पूरा डाटा क्राइम ब्रांच को टेलीकॉम कंपनी से ही मिला। 
 
विज्ञापन

एक शख्स की फोटो पर 500-500 सिम एक्टिव
आरोपियों ने एक शख्स की फोटो लगाकर नाम व पता बदलकर सैकड़ों आधार कार्ड बनवाए। इन आधार कार्ड को लगाकर सिम एक्टिव किए। यहां पर भी कंपनी सवालों के घेरे में है। इतने सारे नंबरों में तस्वीर एक और नाम पता बदला हुआ था तो संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों ने इस पर सवाल क्यों नहीं खड़े किए। कंपनी की इन सभी खामियों व लापरवाहियों का आरोपियों ने बखूबी फायदा उठाया।
 
यह भी रही बड़ी खामी 
अधिकतर टेलीकॉम कंपनियों का सिम लेने पर बायोमीट्रिक लिया जाता है। इससे ग्राहक का पूरा विवरण ऑनलाइन कंपनी के पास पहुंच जाता है। लेकिन, वीआई जो सिम दे रही है उसमें बायोमीट्रिक नहीं लिया जा रहा है। ये एक बड़ी तकनीकी खामी है। इसी खामी का फायदा आरोपियों ने उठाया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें