दीपावली के त्योहार पर सोमवार शाम पूरा शहर रंग-बिरंगी रोशनी में डूबा नजर आया। घरों, प्रतिष्ठानों और कारखानों में भगवान श्रीगणेश-लक्ष्मी का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। इसके बाद आतिशबाजी की शुरुआत हुई जो देर रात तक चलती रही। पटाखों ने आसमान में सतरंगी छटा बिखेरी। लोगों ने एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
मान्यता है कि प्रभु श्रीराम के बनवास पूरा करने के बाद अयोध्या पहुंचने पर दीपावली मनाई गई थी तभी से यह परंपरा चली आ रही है। सोमवार सुबह घरों और प्रतिष्ठानों को सजाया गया। बंदनवार लगाए गए और फूलों की लड़ी से सजावट की गई। बच्चों और महिलाओं ने रंगोलियां बनाईं। शाम को शुभ मुहूर्त पर लोगों ने भगवान गणेश-लक्ष्मी का पूजन किया। पूजा-अर्चना के बाद आंगन से लेकर घर के हर कोने में दीपक जलाए गए। पूजन के बाद लोगों ने बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। बच्चों ने फुलझड़ियां जलाईं। आतिशबाजी का दौर देर रात तक चलता रहा।