कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग पर सोमवार दोपहर दो से शाम छह बजे तक अप व डाउन लाइन पर ब्लॉक लिया गया। इसका असर कानपुर सेंट्रल से आने-जाने वाली ट्रेनों पर भी पड़ा। झांसी रूट की ट्रेनों को गोविंदपुरी, भीमसेन व पामा स्टेशनों के यार्ड पर रोकना पड़ा। शताब्दी सहित चार ट्रेनों को लखनऊ-बालामऊ-उन्नाव के रास्ते कानपुर लाए जाने के कारण सेंट्रल पहुंचने में तीन घंटे देर हुई। तेजस एक्सप्रेस साढ़े छह घंटे देर से आई।
लखनऊ रूट पर जैतीपुर में नान इंटरलॉकिंग और ट्रैक उच्चीकरण का कार्य चल रहा है। इसके लिए सोमवार को चार घंटे का ब्लॉक लिया गया। इस वजह से लखनऊ इंटरसिटी सहित 69 ट्रेनें एक से सात घंटे तक लेट रहीं और सेंट्रल स्टेशन पर देरी से पहुंची। लखनऊ रूट पर ट्रेन संचालन बाधित होने से चौतरफा रूटों पर ट्रेन संचालन बाधित हो गया। इस वजह से करीब 2212 यात्रियों ने टिकट लौटाए। सुबह से शाम तक प्लेटफार्मों पर ट्रेनों के इंतजार में यात्रियों की भीड़ रही।
ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
ये ट्रेने रहीं लेट
ट्रेन नंबर- 82501 लखनऊ-नई दिल्ली आईआरसीटीसी तेजस 6.30 घंटे, 12180 आगरा- लखनऊ इंटरसिटी 6:30 घंटे, 11109 झांसी-लखनऊ इंटरसिटी साढ़े तीन घंटे, 05060 उधना रक्सौल स्पेशल 9 घंटे, 02570 दरभंगा-नई दिल्ली स्पेशल 7 घंटे, 12594 भोपाल- लखनऊ चारबाग एक्सप्रेस 6:30 घंटे, 22426 अयोध्या कैंट वंदे भारत ढाई घंटे, 19410 साबरमती एक्सप्रेस 5:30 घंटे, 02398 आनंद विहार-गया स्पेशल 4 घंटे लेट रही।
ट्रैक जलमग्न तो 12 पंप चालू कराए
सोमवार दोपहर तक झमाझम बारिश हुई। इसके चलते दिन में 10 बजे सेंट्रल स्टेशन और पावर केबिन के बीच का ट्रैक जलमग्न हो गया। वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक अवधेश द्विवेदी ने 12 पंप चलवाकर निकासी शुरू कराई। ट्रेनों को कॉशन देकर चलवाया गया। दोपहर बाद से संचालन सुचारू हो सका। इसके अलावा बारिश से सीपीसी मालगोदाम परिसर तालाब बन गया। अनलोडिंग का कार्य बाधित रहने के कारण शेड में माल डंप रहा।
मनमाना किराया वसूला
सिटी और कैंट साइड की सड़कों व सर्कुलेटिंग एरिया में जलभराव का फायदा ई-रिक्शा और ऑटो चालकों ने उठाया। चालकों ने घंटाघर से पोर्टिको तक पहुंचाने के नाम पर 50-50 रुपये लिए। जीटी रोड से एक नंबर प्लेटफार्म जाने के लिए ई-रिक्शा चालकों ने 100 रुपये तक लिए। ट्रेन पकड़ने की मजबूरी में यात्रियों को मुंहमांगा किराया देना पड़ा।
आठ घंटे में चलीं महज छह बसें
झकरकटी बस अड्डा परिसर भी बारिश के पानी से लबालब हो गया। सुबह पांच से दोपहर एक बजे तक सवारी न होने से केवल छह बसें ही रवाना हुईं। सामान्य दिनों में इस अवधि में करीब 200 बसों का संचालन होता है। दिनभर में सिर्फ पांच हजार यात्री ही बसों से गए जबकि इस अवधि में 15 हजार तक यात्री जाते हैं।