कानपुर के दागी दरोगा दयाशंकर वर्मा एक बार फिर विवादों में है। उसने शनिवार को मीडिया के व्हाट्सएप ग्रुपों पर एक मैसेज वायरल किया। जिसमें दावा किया वह रविवार को प्रेसवार्ता करेगा। पुलिस अफसरों ने इसका संज्ञान लिया और देर रात निलंबित कर दिया। दरोगा पर कई बार विभागीय कार्रवाई हो चुकी है और जेल भी जा चुका है। अब उसके खिलाफ एक और विभागीय जांच शुरू कराई गई है।
दरोगा दयाशंकर वर्मा नजीराबाद थाने में तैनात था। दो दिन पहले ही उसको लाइन हाजिर किया गया है। 2014 में वह बर्रा थाने में मुंशी था। इस दौरान लुटेरे से रिश्वत लेने के मामले में तत्कालीन आईजी आशुतोष पांडेय ने उसकी गिरफ्तारी करवाकर जेल भेजा था। अब दरोगा लगातार यह दावा कर रहा है कि वह निर्दोष था।
तत्कालीन थानेदार व अन्य पुलिस कर्मियों ने मिलीभगत कर उसको जेल भेजा। इसी संबंध में उसने मैसेज वायरल किया कि वह रविवार को किदवई नगर में प्रेसवार्ता करेगा। इसकी जानकारी होते ही उसको निलंबित कर दिया गया। हालांकि जब से उसको लाइन हाजिर किया गया उसने लाइन में आमद नहीं कराई है। वह गैर हाजिर चल रहा है।
रिश्वतखोरी का ऑडियो हो चुका है वायरल
नवंबर 2020 में एक कॉल रिकॉर्डिंग वायरल हुई थी। जिसमें दरोगा दयाशंकर एक शख्स से तीन हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। तत्कालीन एसएसपी ने उसको निलंबित कर दिया था। तब दया शंकर की ककवन थाने में तैनाती थी। पुलिस अफसरों ने बताया कि इसी तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई। वह दोषी भी पाया जा चुका है।
खुद फंस रहा है दरोगा
जेल भेजे जाने वाले मामले में दयाशंकर ने शासन में शिकायत की थी। जिसकी जांच कुछ समय पहले एडीसीपी साउथ ने की। जिसमें मामले की विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की गई है। दरोगा ने तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत अन्य पर आरोप लगाए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच में दरोगा खुद ही फंसा रहा है। चूंकि मामला पुराना है। इसलिए विस्तृत जांच की जरूरत है।