कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट कोविड रोगी वैक्सीन जरूर लगवा लें। नगर में अभी तक 81 हजार से अधिक लोग कोरोना की चपेट में आने के बाद ठीक हो चुके हैं। इनमें से 15 फीसदी रोगी लेवल थ्री के संक्रमण से जूझकर निकले हैं।
कोरोना से जंग जीते छह माह से अधिक समय हो गया है तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट का मानना है कि ऐसे लोगों को दोबारा संक्रमण का खतरा अधिक है। दरअसल, संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज तीन माह बाद कम होने लगती हैं। ऐसे में पोस्ट कोविड रोगियों को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।
विज्ञापन
बहुत से रोगी ऐसे भी हैं, जो निगेटिव तो हो गए पर अभी तक लॉन्ग कोविड में चल रहे हैं। ऐसे रोगियों को कोविड जैसी ही दिक्कतें बनी रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट कोविड रोगी वैक्सीन जरूर लगवा लें। नगर में अभी तक 81 हजार से अधिक लोग कोरोना की चपेट में आने के बाद ठीक हो चुके हैं। इनमें से 15 फीसदी रोगी लेवल थ्री के संक्रमण से जूझकर निकले हैं।
इनको अभी तक तकलीफ बनी हुई है। रोगियों के गुर्दों और लिवर में खराबी आ गई है। साथ ही सांस की तकलीफ है। जरा सा फ्लू होने पर इनके फेफड़ों में निमोनिया हो जा रहा है। इनमें कोरोना जैसे लक्षण लगातार दिख रहे हैं। इन्हें लॉन्ग कोविड की श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें दोबारा संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा ने बताया कि लॉन्ग कोविड मरीज वैक्सीन जरूर लगवा लें।
विज्ञापन
बूस्टर डोज भी लें और कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें। डेल्टा और ओमिक्रॉन का संयुक्त संक्रमण जिसे डेल्मीक्रॉन कहा जा रहा है, उसका भी खतरा है। तीन माह के बाद प्राकृतिक रूप से बनीं एंटीबॉडीज नष्ट होने लगती हैं। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह का कहना है कि रोगियों से कोविड गाइड लाइन का पालन करने की अपील की जा रही है।