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Kanpur: घर बैठे सर्वे…खाली प्लॉट पर भी लगा दिया गृहकर, लाखों लोग झेल रहे हैं 40% तक ज्यादा कर, पढ़ें रिपोर्ट

Wed, 18 Jun 2025 11:41 AM IST
हिमांशु अवस्थी मनीष वर्मा, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: नगर निगम के मुताबिक, 2008 से पहले पार्षद या कमेटी ही मनमाने तरीके से बिल बना देते थे और उसे ही सत्य मान लिया जाता था। इससे राजस्व की हानि होती थी। अब जीआईएस सर्वे के आधार पर बिल बनता है। इसके आंकड़े सैटेलाइट इमेज के माध्यम से तैयार किए गए हैं।
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कानपुर नगर निगम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सर्वे में गड़बड़ी का खामियाजा नगर निगम सीमांत क्षेत्र से जुड़ी 11.50 लाख की आबादी झेल रही है। घर बैठे किए गए सर्वे के कारण खाली प्लाॅटों का भी गृहकर बिल भेजा गया है। सर्वे करने वाली कंपनी आईटीआई लिमिटेड ने जो डाटा नगर निगम को दिया। इसके हिसाब से लोगों का गृहकर 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़कर आ रहा है। इसे ठीक कराने के लिए लोग चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कानपुर नगर निगम सीमा क्षेत्र की आबादी करीब 45.81 लाख है।

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2008 के बाद नगर निगम ने इनका जीआईएस सर्वे कराने का निर्णय लिया था। शासन की ओर से नामित कंपनी आईटीआई लिमिटेड को इसका जिम्मा दिया गया। कंपनी ने वर्ष 2017-18 से सर्वे शुरू कर 2022 में अपनी रिपोर्ट दी। इसके अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में कुल 2,13,960 संपत्तियों का मिलान हुआ, जबकि 67,730 का नहीं हो सका। सर्वे में 70,945 प्लॉट भी सामने आए। संस्था का दावा था कि उसने 2,71,751 नई संपत्तियां खोजी हैं। ऐसे में नगर निगम सीमा क्षेत्र में अब 6,24,386 संपत्तियां हो गई हैं। इसी सर्वे के आधार पर गृहकर के बिल बनाए जाने लगे।

केस: 1
रजत राजपूत ने 2003 में हंसपुरम में 142 वर्ग मीटर का प्लाॅट खरीदा। इसकी रजिस्ट्री उन्होंने 2006 में कराई। फिर 2021 में निर्माण कार्य शुरू कराया। इसके बाद वह इस मकान में ही रहने आए थे। अब निगम की ओर से वर्ष 2015-16 से करीब 38 हजार रुपये का गृहकर बिल भेजा गया है। इसे लेकर शिकायत की और शिविर में गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तब से लेकर आज तक गृहकर ठीक कराने के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं।

केस: 2
किदवईनगर, के ब्लॉक निवासी मुकेश गुप्ता का दो खंड का मकान है। इनका 2016 से गृहकर बढ़कर एक लाख रुपये आ रहा है। नगर निगम ने इनके भवन को व्यावसायिक करार दिया है, जबकि मकान में न कोई दुकान या गोदाम है और न ही कोई व्यवसायिक गतिविधि संचालित होती है। इसमें से 2020 में कुछ रुपये जमा किए, लेकिन अब 2024 में फिर एक लाख से अधिक का गृहकर आ गया है। बगल में रहने वाले संदीप शर्मा सहित गली के कई लोगों का गृहकर व्यावसायिक भवन के रूप में बढ़कर आ रहा है। चक्कर काटते थक गए, लेकिन गृहकर ठीक नहीं किया जा रहा।

ऐसे बनता है बिल
नगर निगम के मुताबिक, 2008 से पहले पार्षद या कमेटी ही मनमाने तरीके से बिल बना देते थे और उसे ही सत्य मान लिया जाता था। इससे राजस्व की हानि होती थी। अब जीआईएस सर्वे के आधार पर बिल बनता है। इसके आंकड़े सैटेलाइट इमेज के माध्यम से तैयार किए गए हैं। मकान के सामने की सड़क की चौड़ाई के आधार पर भूमि का मूल्य निर्धारण होता है, उसका 15 प्रतिशत गृहकर के तौर पर वसूला जाता है।

इस तरह हुई चूक

  • तल नहीं, समान बिल भेजे: नियमानुसार किसी मकान के तल के हिसाब से गृहकर बनता है। सर्वे में एक तल के मकान का बिल भी चार से पांच तल के हिसाब से भेज दिया गया।
  • खाली प्लॉट का भेजा बिल: कई मामलों में खाली पड़े प्लॉट का भी गृहकर बनाकर भेज दिया गया। वास्तविकता में वर्षों से इनमें न तो निर्माण हुआ और न ही कोई रह रहा था।
  • बिना जाए हो गया सर्वे: संस्था के कर्मचारी मौके पर गए ही नहीं, और रिपोर्ट तैयार कर भेज दी। इसी का परिणाम है कि लोगों के बढ़े बिल आ रहे हैं।

शिविर का भी नहीं मिला लाभ
कुछ लोगों को तो वर्ष 2022 से गृहकर बढ़ाकर 2024 के बिल के साथ जोड़कर भेज दिया गया। इन मनमाने बिलों से शहरवासी परेशान हैं। कुछ संपत्तियों का तो पुराना बिल भी जोड़कर दिया जा रहा है, जबकि कुछ का 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़कर आ रहा है। नगर निगम ने गड़बड़ बिल ठीक कराने के लिए शिविर भी लगाए, लेकिन इनका निस्तारण नहीं हो सका है। अभी भी लोग बिल ठीक कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं।

75 राजस्व निरीक्षक, फिर भी गड़बड़ी
नगर निगम सीमांत क्षेत्र में कुल 110 वार्ड हैं। खास बात यह कि नगर निगम में 75 राजस्व निरीक्षक तैनात हैं, इसके बाद भी लोगों को गड़बड़ बिलों को ठीक कराने के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है। पीड़ितों का आरोप है कि वार्ड कार्यालयों में राजस्व निरीक्षक मिलते ही नहीं हैं।

एक लाख नए घरों से भी होगी वसूली
नगर निगम पहली बार एक लाख नए घरों से भी गृहकर वसूलने की तैयारी में हैं। सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जीआईएस सर्वे में चिन्हित करीब एक लाख इन नए भवनों के स्वामियों को नोटिस भेजकर गृहकर की वसूली की जाए।
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शासन से नामित संस्था ने जीआईएस सर्वे पूरा कर लिया है। बिलों में गड़बड़ी की शिकायतें आई हैं। इनके निस्तारण के लिए बुधवार से सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक सभी जोन में समस्या समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें प्रत्येक जोनल अधिकारियों का रहना अनिवार्य है। इस शिविर में लोग गृहकर, नामांतरण, त्रुटि सुधार आदि से संबंधित शिकायतों का समाधान करा सकते हैं।  -सुधीर कुमार, नगर आयुक्त, नगर निगम
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