देर तक गेट खटखटाने के बाद भी नहीं खुला
उनके जाने के बाद नूपुर दूसरी मंजिल पर बने कमरे में पढ़ने चली गई, जबकि दादी राम प्यारी पहली मंजिल के कमरे में पूजा पाठ में व्यस्त थीं। दोपहर साढ़े 12 बजे स्कूल की छुट्टी होने पर पार्थ लौटा। काफी देर तक गेट खटखटाने के बाद भी नहीं खुला, तो उसने पड़ोसी सौरभ से पिता को फोन कराया। राम प्रकाश ने बेटी को कई फोन किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच पूजा कर राम प्यारी नीचे आईं, तो उन्होंने गेट खोला।
Kanpur Student Suicide Case
- फोटो : amar ujala
परिजनों का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार
पार्थ ने देर लगने की बात पूछी तो कहा कि उन्हें लगा कि नूपुर ने गेट खोल दिया होगा। वह बहन को देखने ऊपर कमरे में गया तो चीख पड़ा। नूपुर का शव दुपट्टे से पंखे के सहारे लटक रहा था। बेटी के आत्महत्या कर लेने की सूचना पर बदहवास माता-पिता घर पहुंचे और शव से लिपट कर बिलख पड़े। परिजनों ने नीट के पेपर के चलते तनाव ग्रस्त होने की बात कही है। बर्रा इंस्पेक्टर नीरज ओझा ने बताया कि परिजन पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर रहे हैं, हालांकि समझाने की कोशिश की जा रही है।
स्टडी टेबल के सामने लिखा...आई वाना विन एंड आई विल विन
छात्रा नुपुर जिंदगी में सफल होना चाहती थी, उसने अपनी स्टडी टेबल पर एक पर्ची भी चिपका रखी थी कि जो उसे हमेशा सफलता के लिए प्रेरित करती रहती थी। इस पर लिखा था...आई वाना विन एंड आई विल विन। शनिवार को जब फॉरेंसिक टीम ने कमरे की पड़ताल की तो उन्हें कमरे में नीट से जुड़ी किताबें और उसकी डायरी व रजिस्टर रखे मिले। इनमें परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले मोटिवेशनल वाक्य ही लिखे थे।
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डॉक्टर बनना चाहती थी नुपुर
छात्रा के परिजनों ने पुलिस को बताया कि बेटी पढ़ने में बहुत मेधावी थी और डॉक्टर बनना चाहती थी। दो साल पहले क्षेत्र के एक पब्लिक स्कूल से उसने 12वीं की परीक्षा बहुत अच्छे नंबरों से पास की। पिता के स्वास्थ्य विभाग में काम करने से वह बहुत प्रेरित थी और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना उसका सपना था। बेटी के शव से लिपट कर बिलख रही मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
एक घंटे पहले मां से की थी फोन पर बात
वह बार बार कहती रहीं हाय कहां कमी रह गई बेटी, जो तुमने ये कदम उठा लिया। एक घंटा पहले बेटी से फोन पर बात हुई थी। उस समय उन्हें अगर जरा सा अंदाजा होता कि बेटी ऐसा कदम उठा लेगी तो वह उसे आकर रोक लेती। यही हाल पिता का था, वो भी रोते हुए यही कह रहे थे कि कोई समस्या थी बेटी तो बता देती। ये क्या कर लिया। उन लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि साढ़े 11 बजे मां से बात होने के बाद और साढे 12 बजे भाई के आने से पहले ऐसा क्या हुआ जो बेटी ने फंदा लगाकर जान दे दी।
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डायरी के पन्ने पर लिखा हुआ कुछ काटा
फॉरेंसिक टीम ने सुसाइड नोट की आस में कमरे में रखीं किताबें पलटी, लेकिन उन्हें सुसाइड नोट नहीं मिला। स्टडी टेबल पर रखी डायरी के पिछले पन्ने पर अंग्रेजी में कुछ वाक्य लिखे थे। इनमें 19 वर्ष की होने की बात लिखी थी, लेकिन बाद में इन शब्दों को काटा गया था। चौकी इंचार्ज ने जांच के लिए इस पेज की फोटो खींच ली।