15 अप्रैल को गांव गया था अरविंद
इसमें टीबी के नियंत्रण और रोकथाम से संबंधित पढ़ाई कराई जाती है। उसने दिसंबर 2024 में मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था।अरविंद के पिता मोतीलाल ने बताया कि वह 15 अप्रैल को गांव आया था, जहां से शुक्रवार को ही उनसे 500 रुपये लेकर मेडिकल कॉलेज के लिए निकला। उनकी शनिवार की दोपहर तक उससे बातचीत हुई।
अंदर से बंद था कमरे का दरवाजा
शाम को अरविंद की कॉल नहीं उठी। उनको लगा कि शायद थकने की वजह से ब्लॉक नंबर छह स्थित कमरे में सो गया होगा। रविवार की सुबह, दोपहर और शाम को उसका मोबाइल नहीं उठा तो वह स्वयं मेडिकल कॉलेज आ गए। उसके कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।
मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया
स्वरूपनगर इंस्पेक्टर सूर्यबलि पांडेय और चौकी प्रभारी इंदुकांत मौके पर पहुंचे। उन्होंने दरवाजा जैसे ही तोड़ा तो मोतीलाल के मुंह से चीख निकल गई। अंदर अरविंद का शव फंदे से लटका हुआ था। घटना का पता चलते ही मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया। प्राचार्य प्रो. संजय काला, वार्डन और अन्य अधिकारियों को सूचना दी गई।
वीडियो कॉल कर आत्महत्या करने की बात सामने आई
स्वरूपनगर इंस्पेक्टर ने बताया कि वीडियो कॉल कर आत्महत्या करने की बात सामने आई है। घटना की जांच कराई जा रही है। छात्र के पिता मोतीलाल प्राथमिक विद्यालय में संविदा के शिक्षक हैं। परिवार में पत्नी चित्रा देवी, बेटी राधा और छोटा बेटा शिवा है। पुलिस के अधिकारियों ने युवती के संबंध में छात्र की दिनचर्या के बारे में सहपाठियों से जानकारी की है।
साथी बोले- कुछ दिन से तनाव में था अरविंद
अरविंद एक साधारण परिवार से था। वह मेडिकल कॉलेज में बीसीजी टेक्नीशियन की पढ़ाई कर अपने भविष्य को संवारने का सपना देख रहा था। साथी छात्रों ने बताया कि वह पढ़ाई में होनहार था, रोज क्लास ले रहा था, लेकिन कुछ दिनों से तनाव में था। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
आधार कार्ड खोने पर हुई थी पिता से बात
अरविंद के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत होशियार था। सभी उसकी तारीफ करते थे। उसने इतना बढ़ा कदम क्यों उठा लिया। कोई परेशानी थी तो बताना चाहिए था। शनिवार को जब दोपहर में उससे बात हुई, तो उसने अपना आधार कार्ड खो जाने की बात कहकर घर में ढूढ़ने के लिए कहा था।
अरविंद बीसीजी टेक्नीशियन का कोर्स कर रहा था। उसके साथ पढ़ने वालों से भी पूछताछ की गई। वह किसी से अधिक घुलता-मिलता नहीं था। साथियों के नंबर उसने ब्लॉक लिस्ट में डाल रखे थे। ज्यादातर अकेला रहता था। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। -डॉ. अवधेश कुमार, विभागाध्यक्ष रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभाग, डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल