बर्रा 6 निवासी रविन्द्र तिवारी और सुनीता की बेटी खुशहाली त्रिपाठी पति अर्पित के साथ मणिपुर में फंस गई हैं। बवालियों ने पति के साथ काम करने वाले कुछ लोगों के घरों में भी आग लगा दी। तभी अचानक फायरिंग शुरू हो गई। सीआरपीएफ कैंप आने तक लोगों को कई घंटों तक घरों और कार्यालयों में ही कैद रहना पड़ा।
मणिपुर में चल रही हिंसा में कानपुर के कुछ छात्र और अन्य लोग भी फंसे हैं। उनकी मुश्किलों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें भरपेट खाना तो दूर पीने तक का पानी भी आसानी से नहीं मिल रहा है। एक लीटर पानी में पूरा दिन गुजारना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि एक अफवाह बहुत जोरों पर फैली है कि किसी ने पानी में जहर मिला दिया गया है। इसके चलते छात्र सप्लाई का पानी पीने से बच रहे हैं। संस्थान की ओर से दिनभर के लिए एक लीटर पानी बोतल में दिया जा रहा है।
विज्ञापन
गल्ला मंडी नौबस्ता निवासी आढ़ती सत्यनारायण और पद्मा देवी का बेटा ज्ञानेंद्र पटेल एनआईटी, मणिपुर से कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रहा है। फाइनल ईयर के छात्र ज्ञानेंद्र ने बताया कि इम्फाल वेस्ट के लंगोल इलाके में उनका हॉस्टल है। यहां पानी की सप्लाई बंद है। दैनिक कार्यों तक के लिए पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से सीआरपीएफ के जवान रात में इलाके की बिजली बंद करवा देते हैं। खाने में सिर्फ थोड़ा सा सब्जी-चावल मिल रहा है। महाराष्ट्र सरकार अपने छात्रों को वापस ले गई, जबकि यूपी सरकार ने अभी तक संपर्क नहीं किया है।
घंटाघर निवासी निशिथ और सीमा शर्मा के बेटे आवेग शर्मा भी एनआईटी से बीटेक कर रहे हैं। आवेग ने बताया कि माहौल बिगड़ने के बाद से हॉस्टल में चाय-नाश्ता और रोटियां मिलना बंद हो गईं हैं। केवल एक कटोरी सब्जी और दो चमचा चावल ही मिल रहा है। रोटियां मांगने पर बताया गया कि कारीगर डरकर भाग गए हैं। ऐसे में जो मिल रहा है, वह बहुत है। हॉस्टल से थोड़ी दूर पर फायरिंग और आगजनी होती है तो मन डर जाता है।
विज्ञापन
बर्रा की बेटी ने पति संग सेना के कैंप में ली मदद
बर्रा 6 निवासी रविन्द्र तिवारी और सुनीता की बेटी खुशहाली त्रिपाठी पति अर्पित के साथ मणिपुर में फंस गई हैं। खुशहाली ने बताया कि पति एनएचएआई में इंजीनियर हैं। जब बवाल शुरू हुआ तो अपने कार्यालय में थे और वह कुछ दूर अपने आवास पर। बवालियों ने पति के साथ काम करने वाले कुछ लोगों के घरों में भी आग लगा दी। तभी अचानक फायरिंग शुरू हो गई। सीआरपीएफ कैंप आने तक लोगों को कई घंटों तक घरों और कार्यालयों में ही कैद रहना पड़ा। इसके बाद चार मई से वह और उनके पति असम राइफल्स के कैंप में रह रहे हैं। जल्द ही उन्हें दूसरे कैंप भेजा जाना है।