कानपुर में बड़ी घटना सामने आई है। चकेरी थानाक्षेत्र के सनिगवां में एक किराना दुकानदार ने पत्नी और बेटी की गला दबाकर हत्या करने के बाद खुद को चाकू से घायल कर लिया। सोमवार दोपहर तक जब परिवार का कोई सदस्य घर के बाहर नहीं दिखा तो पड़ोसियों ने 112 पर सूचना दी। मुख्य दरवाजा तोड़कर पुलिस घर में दाखिल हुई तो सबसे पहले किराना दुकानदार खून से लथपथ मिला।
वहीं, पास में ही जमीन पर बिछे गद्दे पर उसकी पत्नी व बेटी का शव पड़ा था। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दुकानदार को कांशीराम अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे हैलट रेफर कर दिया। दुकानदार की जेब से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जिसमें उसने कर्जदारों से परेशान होकर जान देने की बात कही है। चकेरी के कांशीराम कालोनी स्थित फेज-1 निवासी अर्जुन जायसवाल (40) अपनी पत्नी निशा जायसवाल (36) और पीजी में पढ़ने वाली इकलौती बेटी आशवी (04) के साथ तीन साल पूर्व अपने घर में रहने आया था।
अर्जुन की भदौरिया मार्केट में किराना की दुकान है। चकेरी पुलिस के अनुसार वह पहले मेडिकल रिप्रजेंटेटिव था। फिर नौकरी छोड़कर बेटी आशवी के नाम से जनरल स्टोर खोल लिया। घाटा होने पर कई सूदखोरों से करीब छह लाख रुपये कर्ज लिया था। कर्जदारों के तगादे व दबाव बनाने की वजह से वह काफी परेशान था। सोमवार दोपहर तक किसी के बाहर न निकलने पर पड़ोस में रहने वाली कंचन ने दरवाजे पर दस्तक दी। कोई हरकत न होने पर कंचन ने अन्य पड़ोसियों रमाकांत और गुड़िया रानी को सूचना दी।
दोनों ने अनहोनी की आशंका के चलते डायल 112 पर पुलिस को जानकारी दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घर का दरवाजा तोड़ा तो घर के भीतर चारों तरफ खून फैला हुआ था। अर्जुन के हाथ व पैर पर कटे का निशान था और घाव से खून बह रहा था। वहीं, निशा और आशवी का शव जमीन पर रखे गद्दे में पड़े थे। ऊपर से कंबल पड़ा हुआ था। वहीं, सूचना पर आला अधिकारी फॉरेंसिक टीम के साथ पहुंचे और साक्ष्य जुटाए। डीसीपी पूर्वी श्रवण कुमार ने बताया कि एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें कर्जदारों से परेशान होने की बात कही गई है। प्रथमदृष्टया ऐसा लग रहा है कि अर्जुन ने पहले पत्नी और फिर बेटी की हत्या की, फिर खुद को घायल कर लिया। आशंका है कि बेटी को गला दबाकर मारा गया। पत्नी की मौत कैसे हुई, यह पोस्टमार्टम से पता चलेगा। कमरे में एक खाली शीशी मिली है, उसकी भी जांच की जा रही है कि उसमें क्या था।
मैं जीना चाहता था पर कर्जगीरों ने नहीं जीने दिया
मैं जीना चाहता था पर कर्जगीरों ने जीने नहीं दिया। कर्जा था पर इतना नहीं कि मैं दे ना पाऊं, पर समय नहीं दिया। मैं मजबूर होकर आत्महत्या परिवार के साथ कर रहा हूं। इसमें किसी कि गलती नहीं, सिर्फ वजह मैं हूं। भगवान सबको खुश रखे। मैं सिर्फ अपनी पत्नी और बेटी का दोषी हूं... अर्जुन जायसवाल