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कानपुर: व्हाइट फंगस की पुष्टि के लिए सैंपल की कल्चर जांच होगी, रिसर्च सेंटर में भर्ती हैं 12 रोगी

Wed, 26 May 2021 01:45 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में ब्लैक के बाद अब व्हाइट फंगस ने भी हमला बोल दिया है। हैलट अस्पताल में व्हाइट फंगस से पीड़ित दो मरीज भर्ती हैं। इसकी अंतिम पुष्टि के लिए दोनों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
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हैलट अस्पताल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर हैलट में भर्ती व्हाइट फंगस के दो रोगियों के सैंपल की कल्चर जांच कराई जा रही है। सैंपल जांच के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी भेज दिए गए हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि अंतिम पुष्टि कल्चर जांच से होगी।
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इसके साथ ही हैलट के ब्लैक फंगस सेंटर के वार्ड में भर्ती एक रोगी के साइनस की सर्जरी की गई है। महिला रोगी का ऑक्सीजन लेवल कम होने की वजह से सर्जरी नहीं हुई। मंगलवार को ब्लैक फंगस का एक नया मरीज भी भर्ती हुआ। हैलट के ब्लैक फंगस सेंटर के वार्ड में 12 रोगी भर्ती हैं।

पांच रोगियों को इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, उन्हें आराम है। दो कोरोना पॉजिटिव ब्लैक फंगस के रोगियों का इलाज न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि मंगलवार को ब्लैक फंगस का नया रोगी नहीं आया। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने नगर में 23 ब्लैक फंगस के रोगियों की पुष्टि की है। 
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व्हाइट और ब्लैक फंगस में अंतर
व्हाइट फंगस और ब्लैक फंगस का संक्रमण अलग तरह का होता है। व्हाइट फंगस फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके अलावा खून में होकर कहीं पहुंच सकता है। इस फंगस से फेफड़ों में तब्दीली कोरोना की तरह ही आती है। एक्सरे में दोनों संक्रमण की एक तरह की फिल्म आएगी। डॉ. आरबी कमल ने बताया कि ब्लैक फंगस नाक से होकर साइनस और ब्रेन में संक्रमण कर देता है। व्हाइट फंगस जिसे कैंडिडा भी कहते हैं, का कारगर इलाज उपलब्ध है। यह आम तरह का संक्रमण है।
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