ज्योति शुक्ला पांच साल से लखनऊ मेट्रो में मेट्रो पायलट हैं। कानपुर मेट्रो के लोकार्पण के दिन उन्हें खास तौर पर सबसे पहले ट्रेन चलाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
कानपुर के न्यू आजाद नगर निवासी ज्योति शुक्ला मंगलवार को प्रधानमंत्री की सारथी बनीं। वह अपने सहयोगी ट्रेन पायलट (चालक) अंकित कुमार वर्मा के साथ प्रधानमंत्री की मेट्रो ट्रेन आईआईटी मेट्रो स्टेशन से गीता नगर मेट्रो स्टेशन तक ले गईं।
विज्ञापन
कानपुर में सबसे पहले पहले यात्री बने पीएम की मेट्रो ट्रेन चलाकर इन लम्हों को यादगार बनाने वाली ज्योति शुक्ला पांच साल से लखनऊ मेट्रो में मेट्रो पायलट हैं। कानपुर मेट्रो के लोकार्पण के दिन उन्हें खास तौर पर सबसे पहले ट्रेन चलाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मिर्जापुर निवासी निर्भय नाथ शुक्ला की बेटी ज्योति ने बताया कि कुछ समय पहले कानपुर के न्यू आजाद नगर में विजय कुमार मिश्रा से उनकी शादी हुई।
तब से वह यहीं रह रही हैं। उनके पति भी मेट्रो में ही तैनात हैं। वह कहती हैं प्रधानमंत्री को ले जाने वाली मेट्रो का पायलट बनने में उन्हें बहुत ज्यादा खुशी हुई। अच्छा लगा। घबराहट के बजाय उन्होंने पीएम की ट्रेन सामान्य रूप से ट्रेन चलाई। दूसरी तरफ बलिया निवासी अंकित कुमार वर्मा ने बताया कि उन्हें गर्व है कि प्रधानमंत्री ने जिस ट्रेन में सफर किया, वह उसके पायलट हैं।
विज्ञापन
मेट्रो में सफर कर बच्चे गदगद, बोले सपना पूरा हुआ
मेट्रो ट्रेन में सफर करने वाले स्कूली बच्चों का उत्साह और खुशी देखते ही बनी। कई बच्चे तो ऐसे थे, जिन्होंने पहली बार मेट्रो में सफर किया। कुछ बच्चों ने इसे सपना पूरा होने जैसा बताया तो कुछ ने इसे यादगार पल बताया। मेट्रो अधिकारियों ने उसी मेट्रो ट्रेन में कटरी शंकरपुुर सराय स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय और चिंटल्स स्कूल के बच्चों को आईआईटी से मोतीझील तक सफर कराने की योजना बनाई थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने सफर किया।
हालांकि सभी सीटें चिंटल्स स्कूल के 160 बच्चों, शिक्षिकाओं से भर गईं। इसके चलते उच्च प्राथमिक विद्यालय के 50 बच्चों, शिक्षकों के लिए डिपो से दूसरी ट्रेन मंगाई गई। इसके बाद बिना रुके ट्रेन 15 मिनट में नौ किलोमीटर की दूरी तय कर दूर मोतीझील पहुंची। इसके बाद वापस आईआईटी स्टेशन आई।