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कानपुर: राष्ट्रपति से सम्मानित लेखिका के घर पर कब्जा, पीड़िता ने देवरानी और उसके बेटे पर लगाया आरोप

Mon, 11 Oct 2021 08:54 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

मनोरमा शुक्ला के बेटे देवेश ने बताया कि उनकी मां ने वर्ष 2010 में अंतर्ध्वनि और 2015 में अंतर्बोध किताब लिखी है। दोनों किताबों के लिए उन्हें राष्ट्रपति और राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राष्ट्रपति और राज्यपाल से सम्मानित कल्याणपुर की अवधपुरी कॉलोनी निवासी लेखिका मनोरमा शुक्ला के पुश्तैनी घर पर उनकी देवरानी ने बेटे और रिश्तेदारों की मदद से कब्जा कर लिया। मनोरमा ने ग्वालटोली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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विरोध पर गालीगलौज करने का भी आरोप लगाया है। मनोरमा शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2008 में उनके पति विमल शुक्ला का देहांत हो गया था। वह अपने बेटे के साथ अवधपुरी कॉलोनी में रहती हैं। उनके पति चार भाइयों में सबसे बड़े थे।

सूटरगंज में उनका तीन मंजिला पुश्तैनी मकान है। इसमें सभी भाई सह हिस्सेदार हैं। मनोरमा के तहरीर के अनुसार मकान के निचले हिस्से में आधा उनका भी है। उनका हिस्सा देवरानी ऊषा शुक्ला के बेटे लालू उर्फ स्वप्निल ने अपने ससुर कौशल किशोर मिश्रा को दे रखा था। आरोप है कि 40 साल बाद भी न तो उन्होंने कोई किराया दिया और न ही घर के टैक्स का भुगतान किया।
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कुछ दिन पहले कौशल किशोर मकान खाली करके चले गए और चाभी लालू को दे गए। अब वे लालू के साथ मिलकर उनका हिस्सा बेचने की फिराक में है। विरोध किया तो लालू ने गालीगलौज कर जान से मारने की धमकी दी। थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

दो किताबें लिख चुकी हैं मनोरमा
मनोरमा शुक्ला के बेटे देवेश ने बताया कि उनकी मां ने वर्ष 2010 में अंतर्ध्वनि और 2015 में अंतर्बोध किताब लिखी है। दोनों किताबों के लिए उन्हें राष्ट्रपति और राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं। अब वे टीयर्स टर्निंग इन टू चीयर्स किताब लिख रही हैं। जल्द ही इसका विमोचन किया जाएगा।
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