असीम अरुण के पिता श्रीराम अरुण प्रदेश के दो बार डीजीपी रह चुके हैं। दोनों ही बार वह भाजपा या भाजपा समर्थित मायावती सरकार में डीजीपी रहे। असीम अरुण प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में मुरादाबाद, प्रयागराज, हैदराबाद, मेरठ में तैनात रहे।
कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने भाजपा में शामिल होने का एलान किया है। असीम अरुण ने फेसबुक पर पोस्ट में लिखा है, महात्मा गांधी द्वारा दिए गए ‘तिलस्म’ कि सबसे कमजोर और गरीब व्यक्ति के हितार्थ काम करने का प्रयास करूंगा।
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आईपीएस की नौकरी और अब यह सम्मान, सब बाबा साहब आंबेडकर द्वारा अवसर की समानता के लिए रचित व्यवस्था के कारण ही संभव है। मैं उनके उच्च आदर्शों का अनुसरण करते हुए अनुसूचित जाति और जनजाति एवं सभी वर्गों के भाइयों और बहनों के सम्मान, सुरक्षा और उत्थान के लिए कार्य करूंगा।
मैं समझता हूं कि यह सम्मान मुझे मेरे पिता स्व. श्रीराम अरुण और मां स्व. शशि अरुण के पुण्य कर्मों के प्रताप के कारण ही मिल रहा है। उन्होंने लिखा है कि मैं प्रयास करूंगा कि पुलिस बलों के संगठन के अनुभव और सिस्टम विकसित करने के कौशल से पार्टी को अपनी सेवाएं दूं और पार्टी में विविध अनुभव के व्यक्तियों को शामिल करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को सार्थक बनाऊं।
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पिता रह चुके हैं यूपी के दो बार डीजीपी
असीम अरुण के पिता श्रीराम अरुण प्रदेश के दो बार डीजीपी रह चुके हैं। दोनों ही बार वह भाजपा या भाजपा समर्थित मायावती सरकार में डीजीपी रहे। असीम अरुण प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में मुरादाबाद, प्रयागराज, हैदराबाद, मेरठ में तैनात रहे। उसके बाद उन्हें टेढ़ी गढ़वाल (अब उत्तराखंड में) का एसपी बनाया गया था। वह बलरामपुर, हाथरस, सिद्घार्थनगर के एसपी भी रह चुके हैं। मायावती शासनकाल में वह अलीगढ़, गोरखपुर और आगरा के पुलिस कप्तान रहे। पिछली सपा सरकार में वह तकनीकी सेवा, रेडियो मुख्यालय, यातायात और एटीएस में रहे। भाजपा सरकार में वह ढाई साल तक एटीएस में तैनात रहे। यहीं उनका प्रमोशन हुआ। इसके बाद यूपी 112 में एडीजी रहे। 26 मार्च को कानपुर में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद वह कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के पहले पुलिस आयुक्त बने थे।