लचर कार्यशैली पर उठ रहे हैं सवाल
आला अधिकारियों ने दरोगा को निलंबित कर दिया, लेकिन तुरंत हिरासत में लेने के बजाय तहरीर मिलने व रिपोर्ट दर्ज होने का इंतजार किया। फिर बुधवार शाम एफआईआर दर्ज हुई तो सचेंडी पुलिस ने दरोगा के नामजद न होने का बहाना बनाया। जांच अधिकारी जब तक जांच में उसका नाम शामिल करते, दरोगा पुलिस की पकड़ से दूर हो गया। पुलिस की इस लचर कार्यशैली पर अब सवाल उठ रहे हैं।
चौकी में काफी देर तक बैठा रहा दरोगा
जिस समय रिपोर्ट दर्ज हुई, सचेंडी पुलिस चाहती तो किदवईनगर पुलिस को सूचना देकर आरोपी दरोगा को पकड़ सकती थी। हालांकि सचेंडी पुलिस ने ऐसा नहीं किया। यही वजह रही कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद रात करीब दस बजे तक दरोगा चौकी पर मौजूद रहा। इसके बाद वह किदवईनगर थाने गया और वहां से कहीं चला गया। वहीं, किदवईनगर पुलिस ने भी हाईप्रोफाइल मामले की जानकारी होने के बावजूद दरोगा को हिरासत में लेना मुनासिब नहीं समझा।
केस: 1 एसीपी मोहसिन खान
आईआईटी की पीएचडी छात्रा ने 12 दिसंबर 2024 को एसीपी कलक्टरगंज मोहिसिन खान पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। एसीपी ने 16 दिसंबर को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। इसके बाद 19 दिसंबर को कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक का आदेश दिया था।
पूर्व एसओ रेलबाजार विजय दर्शन शर्मा
- फोटो : amar ujala
केस: 2 दरोगा विजय दर्शन
बर्रा में 30 सितंबर को शिक्षिका के घर से 25 लाख का सोना व पांच लाख की नकदी चोरी के मामले में पकड़े गए चोरों ने रेलबाजार एसओ विजय दर्शन पर माल हड़पने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस उसे पकड़ पाती इससे पहले वह भूमिगत हो गया और बाद में कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक का आदेश लेकर आ गया।
दिनेश त्रिपाठी, डीसीपी वेस्ट
- फोटो : amar ujala
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कई टीमें लगाकर आरोपी दरोगा की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। गाड़ी नंबर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज हुई है। -दिनेश त्रिपाठी, डीसीपी वेस्ट