हाई ग्रेड फीवर के बाद निमोनिया से एक रोगी की मौत हो गई। एक बच्चा समेत दो में डेंगू की पुष्टि हुई है। बुखार के पांच रोगी गंभीर हालत में हैलट इमरजेंसी में भर्ती किए गए। ओपीडी में आए जिन बुखार के रोगियों में डेंगू जैसे लक्षण मिले, उनके सैंपल माइक्रोबायोलॉजी विभाग जांच के लिए भेजे गए। डॉक्टरों का कहना है कि हाई ग्रेड फीवर में पैरासीटामाल असर नहीं कर रही है। बुखार रोगी खुद से एस्प्रिन जैसी दवाएं न लें, प्लेटलेट्स कम होने से ब्लीडिंग हो सकती है।
हाई ग्रेड फीवर के बाद फजलगंज के रहने वाले जय किशन (55) की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि बुखार आने के बाद क्षेत्र के डॉक्टर ने एक्सरे कराया था। उसने निमोनिया बताया और दवा दी। गुरुवार दोपहर हालत बिगड़ गई तो हैलट ले जाने लगे लेकिन मौत हो गई। हाई ग्रेड फीवर के 10 रोगियों के सैंपल डेंगू जांच के लिए भेजे गए हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के संचारी रोग अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि ए-टिपिकल वायरल संक्रमण के रोगियों में लक्षण हैं।
हाई ग्रेड फीवर में सामान्य पैरासीटामाल टेबलेट काम नहीं कर रही। ऐसे रोगियों को इंजेक्शन देना पड़ा रहा है। इसके साथ ही डोज बढ़ा दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत से लोग दर्द में खुद से एस्प्रिन टेबलेट घोल कर पी लेते हैं। इससे खून पतला होता है। वायरल संक्रमण में वैसे ही प्लेटलेट्स घटती हैं। इससे शरीर में खून का रिसाव हो सकता है। कई रोगी इमरजेंसी में खून के रिसाव के भी आए, उनके स्टूल में ब्ल़ड आ रहा था।
बुखार रोगी में ये लक्षण हों तो तुरंत पहुंचें अस्पताल
- उल्टी-दस्त न रुके
- नाक, मुंह, पाखाना और पेशाब से खून आ रहा हो
- रोगी को बेहोशी आ जाए
- ऊपर वाला ब्लड प्रेशर 90 के नीचे आ जाए
- तेज बुखार के साथ शरीर में दाने और लाल चकत्ते पड़ जाएं
- घबराहट हो, पसीना और चक्कर आए
- सांस फूले और नब्ज बहुत तेज चलने लगे