कानपुर में पंचायत चुनाव की आहट से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के नाम पर घपलों-घोटालों की शिकायतों की भरमार हो गई है। एक वर्ष में जिले की 50 ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार की शिकायतें हुईं। एक-एक ग्राम पंचायत में 300 से 600 शिकायतें आई हैं। इसमें सबसे अधिक शिकायतें विकास कार्यों के साथ हैंडपंप रिबोरिंग की हैं। सीडीओ ने सबसे ज्यादा शिकायतों वाली ग्राम पंचायतों की सूची निकलवाई, तो इसका खुलासा हुआ।
अब जल्द ही सीडीओ की अगुवाई में गांव-गांव चौपाल लगाकर इन शिकायतों का निस्तारण होगा। जिले के 10 ब्लॉक में 590 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2021-22 इन गांवों में पंचायत चुनाव हुए थे। सरकार ने पिछले चार वर्ष में इन पंचायतों में विकास कार्यों के लिए बजट का खजाना खोल दिया है। राज्य वित्त आयोग के साथ ही 15वें वित्त आयोग में करोड़ों रुपये का बजट दिया रहा गया है। हर पंचायत में प्रत्येक वर्ष औसतन 20 से 40 लाख रुपये दिए गए हैं। मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन व अन्य योजनाओं में अलग निधि जारी की गई है।
आईजीआरएस पोर्टल पर लगातार बढ़ रही शिकायतें
हालांकि, पंचायतों में कागजी कामों से लाखों रुपये ठिकाने लगा दिए गए। घटिया कामों पर भी मोटा पैसा खर्च दिखाया गया। विकास योजनाओं के नाम पर गांवों में हो रही गड़बड़ी अब खुलेआम सामने आने लगी है। अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनाव से पहले प्रधान और विरोधियों की शिकायतें कुछ ज्यादा आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आईजीआरएस पोर्टल पर लगातार बढ़ रही शिकायतों का जब सीडीओ ने संज्ञान लिया, तो पोर्टल से ग्राम पंचायतों को चिह्नित कराया। इसमें सबसे अधिक शिकायतों वाली 50 ग्राम पंचायतें की जानकारी मिली।
एक ब्लॉक की पांच-पांच ग्राम पंचायत चिह्नित
सीडीओ ने आईजीआरएस पोर्टल पर उन पांच-पांच ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया, जिसमें सबसे ज्यादा शिकायतें आईं। भीतरगांव ब्लॉक की साढ़ ग्राम पंचायत में सबसे ज्यादा 302 शिकायतें, बिल्हौर देहात ग्राम पंचायत में 423, चौबेपुर कलां में 333, घाटमपुर के सजेती में 310, ककवन में 375, कल्याणपुर के टिकरा में 573, पतारा में 615, सरसौल के महाराजपुर में 411, शिवराजपुर के डोडवा जमौली में 167, विधनू के पिपरगवां ग्राम पंचायत में 95 शिकायतें आईं। ये ब्लाक की सबसे ज्यादा शिकायत वाली ग्राम पंचायतें हैं।
चुनाव से पहले बजट का कैश आउट
सूत्र बताते हैं कि पंचायत स्तर पर चुनाव से पहले योजनाओं का बजट तेजभ् से खर्च किया जा रहा है। ठेकेदारों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत से काम की गुणवत्ता पर खुला खेल हो रहा है। नालियां आधी बनीं, सड़कें टूटीं, और सामग्री की सप्लाई अधूरी है , लेकिन कागजों में काम पूर्ण दिखा दिया गया है। ग्राम पंचायतों की इन गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार जिलास्तर तक पहुंच रही हैं। जांच और कार्रवाई की रफ्तार बेहद सुस्त है। कई मामलों में तो शिकायत दर्ज होने के महीनों बाद भी न जांच हुई, न ही दोषियों पर कोई शिकंजा कसा गया। पोर्टल पर कई शिकायतें निस्तारित कर दी गईं।
सबसे ज्यादा शिकायतों वाली ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया है। पोर्टल से सभी शिकायतें निकलवाकर गांव-गांव जाकर अफसर चौपाल लगाएंगे। ग्रामीणों की जो भी शिकायतें हैं उनका गुणवत्ता पूर्ण तरीके से निस्तारण किया जाएगा। -दीक्षा जैन, सीडीओ