श्वेता रामजी शुक्ला, काजल तिवारी, अदिति राजपूत
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पंचायत चुनाव का नजारा इस बार बदला हुआ है। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने का सपना संजोए पतियों को जब आरक्षण का झटका लगा तो उनकी पत्नियों ने मोर्चा संभाल लिया है। अब ये महिलाएं क्षेत्र का विकास कराने का दावा कर अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटी हैं। यही वजह है कि अपना कॅरियर छोड़कर राजनीति के मैदान में कूद पड़ी हैं। किसी ने आईआईटी जैसे संस्थान से इंजीनियरिंग की तो किसी ने एमएससी, बीएड की डिग्री हासिल की है।
सरकारी नौकरी छोड़ सियासत में उतरीं
घाटमपुर ब्लॉक के नारायणपुर गांव में रहने वाली श्वेता रामजी शुक्ला ने एमएससी, बीएड और आईआईटी रुड़की से बीटेक किया है। पढ़ाई के दौरान ही वह राजस्व निरीक्षक के पद पर चयनित भी हो गईं, लेकिन नौकरी छोड़ अब परास जिला पंचायत सदस्य सीट से प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। श्वेता के पति रामजी शुक्ला बैंक अधिकारी हैं। श्वेता का कहना है कि परास में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। यहां के लोगों को सभी सुविधाएं मिलें, यही प्रयास रहेगा।
अभी तक घर संभालती थीं, अब लोगों का दुख दर्द सुनेंगी
बिधनू ब्लॉक के सपई गांव की रहने वाली काजल तिवारी शादी के बाद घर-परिवार संभाल रही थीं, अब वह राजनीति का रुख कर चुकी हैं। जिला पंचायत की जामू सीट महिला आरक्षित होने से पति की जगह खुद मैदान में उतरी हैं। मनोविज्ञान से एमए करने वाली काजल का परिवार पहले से सियासी पृष्ठभूमि का रहा है। गरीबों को उनका हक दिलाना और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी, नाली, खड़ंजा और शिक्षा की सुविधाएं सुदृढ़ करना उनकी प्राथमिकता है।
एमए की पढ़ाई छोड़ मैदान में उतरीं अदिति
ककवन ब्लॉक की एमा गांव की रहने वाली अदिति राजपूत (24) ने एमएससी पास करके एमए में प्रवेश लिया था, लेकिन अब पढ़ाई छोड़कर चुनाव में उतर आई हैं। वह जिला पंचायत क्षेत्र कसिगवां वार्ड 14 से मैदान में हैं। उनका कहना है कि चुनाव में सफल होने पर सबसे पहले वो गरीब बच्चों को अच्छी सुविधा दिलाने का प्रयास करेंगी। साथ ही क्षेत्र की जन समस्याएं दूर करने के साथ बालिका शिक्षा को बढ़ावा देंगी।