लेकिन 95 फीसदी रोगी इलाज से ठीक हो जाते हैं, बाकी पांच प्रतिशत को बाद में डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। लू लगने के बाद ग्वालटोली के संजय (25) और हिमानी (49) की मौत हो गई। रोगियों को हैलट लाया गया था। इसी तरह बच्ची रितु (4) की हैलट के बालरोग अस्पताल में मौत हो गई। वह डायरिया की चपेट में थी। हैलट इमरजेंसी में रन्नो देवी (60) की निमोनिया से मौत हो गई। इसके अलावा ब्रेन अटैक के तीन रोगियों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि गर्मी की बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं।