फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का बैनामा कराने और उसे बेचने के मामले में बुधवार को लेखपाल अरुणा द्विवेदी को निलंबित कर दिया गया। एडीएम न्यायिक की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय टीम की जांच में कानूनगो व लेखपाल दोषी मिले थे। डीएम के आदेश के बाद एसडीएम सदर ऋतुप्रिया ने कार्रवाई की। कानूनगो आलोक दुबे मंगलवार को निलंबित किए जा चुके हैं।
ग्राम कला का पुरवा रामपुर भीमसेन निवासी संदीप सिंह ने दो दिसंबर 2024 को जिलाधिकारी से शिकायत की थी। बताया था कि कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के साथ ही सिंहपुर कठार की गाटा संख्या 207 में राजपति और राजकुमारी का नाम दर्ज नहीं था। फिर भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर लेखपाल और कानूनगो ने जमीन का बैनामा करा लिया। उस जमीन की बिक्री भी कर दी। इसी तरह दूसरे मामले में ग्राम रामपुर भीमसेन की गाटा संख्या 895 और अन्य गाटा पर मोहनलाला की वसीयत के आधार पर नायब तहसीलदार सचेंडी के न्यायालय में नामांतरण वाद विचाराधीन था।
इसके बावजूद कानूनगो आलोक ने राजपति और राजकुमारी से मिलकर 11 मार्च 2024 को अपने नाम वरासत आदेश करा लिया। उसी दिन 11 मार्च को ही जमीन का बैनामा भी अपने पक्ष में करा लिया। तत्कालीन जिलाधिकारी ने एडीएम न्यायिक, एसडीएम सदर और एसीपी की टीम गठित कर मामले की जांच कराई थी। जांच में पाया गया कि राजस्व निरीक्षक आलोक दुबे और लेखपाल ने मिलकर जमीन खरीदी और बाद में उसकी बिक्री कर दी। इसकी अनुमति विभागाध्यक्ष से भी नहीं ली और न ही उन्हें कोई जानकारी दी। नियमों के विरुद्ध कागजों में हेराफेरी की। रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने मंगलवार को कानूनगो को निलंबित कर दिया था। वहीं, बुधवार को एसडीएम ने लेखपाल को निलंबित कर दिया।