निजीकरण के खतरे से मिली मुक्ति
संघर्ष समिति के नेताओं ने डॉ. लालजी निर्मल को जानकारी दी कि उनके निरंतर प्रयासों और नगर आयुक्त के कड़े रुख के कारण एक बड़ी जीत हासिल हुई है। नगर निगम के 6000 आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों सहित अन्य संवर्गों को अब ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन कर्मचारियों को अब किसी निजी कंपनी या ठेकेदार के अधीन नहीं भेजा जाएगा। यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए संजीवनी जैसा है जो लंबे समय से निजी कंपनियों द्वारा शोषण किए जाने के डर में जी रहे थे।
नियम 115 और MLC का हस्तक्षेप
विदित हो कि डॉ. लालजी निर्मल ने पूर्व में इस निजीकरण के प्रकरण को विधान परिषद में नियम 115 के तहत उठाया था। उनके इस सवाल ने शासन और प्रशासन को जवाबदेह बनाया, जिससे संघर्ष समिति के आंदोलन को जबरदस्त बल मिला। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि डॉ. निर्मल की सक्रियता ने ही आज हजारों परिवारों को निजी हाथों में जाने से बचा लिया है।
वेतन और आउटसोर्स सेवा निगम का मुद्दा
मुलाकात के दौरान कर्मचारी नेताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि मात्र 10,000 रुपये के मासिक मानदेय में कर्मचारियों के परिवार का भरण-पोषण करना लगभग नामुमकिन हो गया है। उन्होंने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन कर बजट भी आवंटित कर दिया है और इस संबंध में शासनादेश भी जारी हो चुका है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इस शासनादेश को कानपुर में तत्काल प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। डॉ. निर्मल ने आश्वासन दिया कि वह इस विषय पर जल्द ही मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से बात कर इसे लागू करवाएंगे।
20 साल का लंबा इंतजार: 631 अचयनित कर्मी
नगर निगम कानपुर में एक और गंभीर समस्या 631 अचयनित संविदा कर्मचारियों की है, जो पिछले 20 वर्षों से अपनी सेवाओं का योगदान दे रहे हैं। इन कर्मचारियों को भी केवल 10 हजार रुपये मिल रहे हैं। हालांकि नगर निगम सदन ने एक प्रस्ताव पास कर शासन को भेजा है कि इन सभी को पूर्ण संविदा पर लिया जाए और इसका पूरा वित्तीय भार नगर निगम खुद उठाएगा, लेकिन यह फाइल अभी भी शासन स्तर पर लंबित है। डॉ. लालजी निर्मल ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नेताओं से लिखित पत्र मांगा है ताकि वह शासन स्तर पर पैरवी कर सकें।