आरोपियों को जेल ले जाती पुलिस
- फोटो : amar ujala
विश्वास की बलि चढ़ा मासूम कुशाग्र
30 अक्टूबर 2023 की वह काली रात कनोडिया परिवार कभी नहीं भूल सकता। ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, जिसे परिवार अपना सदस्य मानता था। वहीं, कुशाग्र की मौत की पटकथा की मुख्य सूत्रधार निकली। महज 30 लाख रुपये की फिरौती के लिए उसने अपने प्रेमी प्रभात और साथी शिवा के साथ मिलकर कुशाग्र का गला घोंट दिया।
ट्यूशन टीचर को जेल ले जाती पुलिस
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कोर्ट में फांसी की गूंज, पर मिली उम्रकैद
मां ने रोते हुए कहा कि जिस टीचर के हाथ में कुशाग्र का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी थी, उन्हीं हाथों ने उसकी सांसें छीन लीं। सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान कुशाग्र के पक्ष के अधिवक्ताओं और अभियोजन पक्ष ने एक सुर में इसे जघन्यतम अपराध बताते हुए फांसी की मांग की थी। दोषियों के वकीलों ने उनके गरीब होने और कोई पुराना आपराधिक इतिहास न होने का तर्क देकर रहम की भीख मांगी।
साक्ष्यों ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि अपार्टमेंट के चौकीदार जिसने फिरौती पत्र फेंकने आए युवक की स्कूटी पहचानी और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज इस केस के सबसे मजबूत स्तंभ रहे। 14 गवाहों की गवाही और कॉल डिटेल रिपोर्ट ने रचिता और उसके साथियों के गुनाह को पूरी तरह साबित कर दिया।