कोर्ट में फैसला सुनने पहुंचे कुशाग्र के मां-बाप
- फोटो : amar ujala
सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए
उसी रात कुशाग्र तक तो पहुंच गए, लेकिन अपहरणकर्ताओं ने तब तक कुशाग्र की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि इस मुकदमे में अभियोजन की ओर से 14 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। अभियुक्तों की कॉल डिटेल रिपोर्ट और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए।
परिवार के साथ कुशाग्र (फाइल फोटो)
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हत्यारों के लिए फांसी की मांग
सभी के आधार पर कोर्ट ने रचिता, प्रभात और शिवा को 20 जनवरी को अपहरण और हत्या का दोषी करार दे दिया था। गुरुवार 22 जनवरी को सजा के बिंदु पर सुनवाई होनी थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से डीजीसी दिलीप अवस्थी, एडीजीसी भास्कर मिश्रा और कुशाग्र की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता कमलेश पाठक सभी ने एक स्वर में इसे वीभत्स हत्या बताते हुए हत्यारों के लिए फांसी की मांग की।
रोते बिलखते कुशाग्र के पिता
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कोई आपराधिक इतिहास न होने जैसे तर्क रखे
वहीं, रचिता के अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी, प्रभात के अधिवक्ता ओम नारायण द्विवेदी और शिवा के अधिवक्ता मनीष मिश्रा ने अभियुक्तों का कोई आपराधिक इतिहास न होने, गरीब होने, उनकी पैरवी तक करने वाला कोई न होने जैसे तर्क रखते हुए सजा में रहम की गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।