प्लांट में उत्पादन बंद कर दिया गया था
इसके बाद में केंद्र सरकार की ओर से जो सब्सिडी के भुगतान के लिए एनर्जी का मानक तय किया गया था, वह 31 मार्च 2025 तक ही मान्य था। इसका नवीनीकरण भी सरकार ने नहीं किया था। इसके बाद एक अप्रैल 2025 से पर्याप्त सब्सिडी के एनर्जी मानक के आदेश की अनुपस्थिति में प्लांट में उत्पादन बंद कर दिया गया था। साथ ही कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। तमाम कर्मचारियों का जेपी एसोसिएट की अन्य कंपनियों में तबादला भी किया गया था।
अदाणी समूह के अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया था
अब प्लांट में 100 के करीब ही स्थायी, अस्थायी कर्मचारी बचे हैं, जिनके वेतन भुगतान का विवाद भी श्रम न्यायालय में विचाराधीन है। भारतीय उर्वरक श्रमिक संघ के अध्यक्ष सुखदेव मिश्रा ने बताया कि एनसीएलटी ने 14 नवंबर 2025 को अदाणी समूह की बिड को मंजूरी दी थी। इस दौड़ में डालमिया, वेदांता, जेपी समूह, पीएनसीएल भी था। 20 दिसंबर 2025 को अदाणी समूह के अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया था। संपत्तियों का मूल्यांकन, प्लांट की स्थिति आदि का ब्योरा जुटाया था। उम्मीद है कि जल्द ही यहां पर उत्पादन शुरू हो सकेगा।
1500 करोड़ से पुनर्जीवित हुआ था प्लांट
1967 में कमीशन हुआ पनकी स्थित फर्टिलाइजर प्लांट आईईएल और डंकन के समय की बंदी झेल चुका है। जेपी ग्रुप ने इस प्लांट को (जो लगभग दस वर्षों तक बंद था) 2012 से 2015 के बीच 1500 करोड़ लगाकर पुनर्जीवित किया था। उस समय जेपी प्रबंधन ने श्रमिकों और कर्मचारियों का लगभग 90 करोड़ का बकाया भी भुगतान किया था और फीड स्टाक को नाप्था से नैचुरल गैस में परिवर्तित किया। पिछलेे दस वर्षों से यह प्लांट अपनी क्षमता के 90 फीसदी से ज्यादा उत्पादन कर रहा था।