आईआईटी कानपुर में हो रहे शोध कार्य और तकनीक आसानी से बाजार तक पहुंच सकेगी। इसे उत्पाद के रूप में ग्राहकों तक पहुंचाने की तैयारी है। संस्थान ने स्केल-ट्रांसेंड कार्यक्रम शुरू किया है। यह दस सप्ताह का है, जिसमें व्यावसायिक सलाह, उद्योग विशेषज्ञता और आर्थिक मदद की सुविधा मिलेगा। पहले चरण में छह प्रोफेसरों के नेतृत्व वाली टीम शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करेगी।
स्केल-ट्रांसेंड, आईआईटी कानपुर के उद्यम विकास मंच स्केल (स्ट्रैटेजिक कैपिटल एंड एडवाइजरी फॉर लॉन्च एंड एक्सपैंशन) की पहल है। इसका उद्देश्य गहन तकनीकी शोध को ऐसे उत्पाद और तकनीक में बदलना है, जिनका बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो सके। पहले बैच में तापमान के अनुसार प्रतिक्रिया देने वाले स्मार्ट पेंट, कानूनी क्षेत्र के लिए लीगल-टेक एआई एजेंट, कंप्यूटेशनल फ्लूड डायनेमिक्स, ऊर्जा बचाने वाली एज इंटेलिजेंस, सल्फर आधारित बैटरी और मेडिकल-ग्रेड न्यूरोस्टिमुलेशन उपकरणों से जुड़े शोध को शामिल किया गया है।
संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे समाधान के रूप में सामने आए जो देश के विकास में योगदान दे। स्केल-ट्रांसेंड के जरिये फैकल्टी इनोवेटर्स को इसके लिए जरूरी संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।धनवृत्ति एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर और स्केल-ट्रांसेंड के आर्किटेक्ट अनुराग सिंह ने कहा कि अच्छा शोध अपने आप सफल कंपनी नहीं बनाता। शोध को कारोबार में बदलने के लिए पूंजी के साथ उद्यम खड़ा करने और उसे आगे बढ़ाने का अनुभव भी जरूरी है। कार्यक्रम में दोनों तरह की मदद एक साथ उपलब्ध कराई जाएगी।