दोपहर के करीब तीन बजे हैं। कानपुर हैलट के किचन में मरीजों को शाम को दिए जाने वाले भोजन को बनाने में कर्मचारी जुटे दिखे। दागदार लौकियां जमीन पर पड़ी थीं। कर्मचारी लौकी उठाकर छीलते हैं और फिर उसे जमीन पर रख देते हैं।
इसके बाद सभी लौकियों को बिना धोए काटते हैं और ड्रम में डाल देते हैं। एक भी कर्मचारी ग्लब्ज-मास्क, सिर पर कैप नहीं लगाए था। वहीं, किचन के दूसरे कमरे में एक थाल में आटा खुला रखा था। तकरीबन 20 मिनट संवाददाता वहीं इंतजार करता रहा कि कोई कर्मचारी शायद इसे ढंक दे आकर पर कोई नहीं आया।
बारिश के मौसम में कोई भी कीड़ा-मकौड़ा इसमें गिर सकता था। गनीमत रही कि इन 20 मिनट में ऐसा नहीं हुआ। वार्डों में तीमारदारों से जब भोजन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दाल और सब्जी के नाम पर नमकीन गर्म पानी मिलता है। कभी कभी तो खाकर उल्टी आ जाती है।
गंदगी में और मानकों का पालन किए बिना खाना बनना गलत है। मौके पर जाकर निरीक्षण करूंगा। खामियां मिलीं तो कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके मौर्या, प्रमुख अधीक्षक, हैलट