मशीनें लगाकर ऊंचे किए जा रहे हैं कूड़े के पहाड़
कूड़े से जैविक खाद बनाने वाले प्लांट में खाद के ढेर नजर नहीं आ रहे थे, जबकि उसके आसपास कूड़े के पहाड़ लगातार ऊंचे होते जा रहे हैं। दो साल पहले तत्कालीन नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन ने बाईपास के किनारे स्थित प्लांट के गेट के पास से करीब 200 मीटर अंदर की तरफ स्थित कार्यालय के आसपास तक एकत्रित कूड़ा निस्तारित कराकर जगह खाली कराई थी, लेकिन कूड़े का निस्तारण न होने से वहां पुन: कूड़ा डंप किया जा रहा है। जेसीबी, पोकलैंड मशीनें लगाकर कूड़े के पहाड़ ऊंचे किए जा रहे हैं।
गर्मी शुरू होते ही लगने लगी है आग
इसके अलावा प्लांट में कार्यालय के पीछे से पांडु नदी के पास तक वर्षों से डंप लाखों मीट्रिक टन कूड़े में गर्मी शुरू होते ही आग लगने लगी है। जानकारों के अनुसार, वर्षों से डंप कूड़े में मीथेन गैस बनने लगती है और तापमान बढ़ने पर उसमें स्वत: आग लगने लगती है। इसके धुएं से प्लांट के आसपास स्थित जमुई, बदुआपुर, कला का पुरवा, पनका, पनका बहादुरनगर, पनकी पड़ाव, सुंदरनगर, गंगागंज आदि गांवों से लेकर रतनपुर, भौंती तक जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
बहुत समय से डंप कूड़े में मीथेन गैस बनने लगती है। इसकी कंसनट्रेशन बढ़ने से चिंगारियां उठती हैं और कूड़े में आग लग जाती है। इसके धुएं में मीथेन, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड आदि गैसें होती हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। मीथेन की अधिकता से सांस लेने में दिक्कत और ज्यादा समय तक इसके प्रभाव में रहने से फेफड़े प्रभावित होंगे। कार्बन मोनो ऑक्साइड की वजह से चक्कर आने से लेकर बेहोशी तक आ सकती है। कार्बन डाई ऑक्साइड की अधिकता से भी सांस लेने में तकलीफ होती है। ये गैसें ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ाती हैं। -डॉ. श्रवण, बॉयोकेमेस्ट्री विभाग, एचबीटीयू
कूड़े के जलने से खतरनाक टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थ) निकलते हैं। फौरी तौर पर व्यक्ति को सांस में दिक्कत, सिरदर्द, मिचली आदि हो सकता है लेकिन लंबे समय तक एक्सपोजर होने से कैंसर, हृदय रोग, नर्वस सिस्टम की खराबी, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होना, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, लिवर डैमेज, पुरुषों में मर्दाना कमजोरी, महिलाओं में बांझपन आदि दिक्कतें भी हो सकती हैं। -डॉ. जेएस कुशवाहा, प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज