केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की टीम ने बुधवार को चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू के संक्रमण की स्थिति का जायजा लिया। वन्यजीवों के स्वास्थ्य और बर्ताव को लेकर जहां चिकित्सकों से बातचीत की, वहीं बाघ, शेर, देसी भालू, शुतुरमुर्ग, गैंडा और पक्षियों के रैंडम सैंपल लिए गए। टीम में शामिल विशेषज्ञों ने परेड और नवाबगंज की पोल्ट्री फार्म से नमूने लिए।
गोरखपुर चिड़ियाघर से कानपुर चिड़ियाघर लाए गए बीमार बब्बर शेर (पटौदी) से बर्ड फ्लू फैला है। संक्रमण से शेर, मोर और एक बतख की मौत हो चुकी है। बतख के साथ ही एक दर्जन से अधिक वन्य जीवों का सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजा था, लेकिन उनकी अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। संक्रमण के खतरे को देखते हुए चिड़ियाघर प्रशासन ने सतर्कता बरती है। बुधवार को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की टीम सुबह 10 बजे जांच और इसके नियंत्रण के लिए चिड़ियाघर पहुंची।
टीम में डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हसबेंडरी दिल्ली के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. विजय कुमार तेवतिया, राष्ट्रीय उच्च पशु रोग संस्थान भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार, आईवीआरआई बरेली के वाइल्ड लाइफ प्रमुख डॉ. एम पावड़े और वैज्ञानिक डॉ. एम करिकलन, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.करन जैन शामिल रहे। एक टीम ने चिड़ियाघर के अंदर पक्षियों के मल, शेर, बाघ, गेंडा के नाक के बाल और लार का सैंपल लिया। मृत शेर, मोर व बतख के बाड़े का पानी व मिट्टी का नमूना लिया।
उन दो बाघिन का भी सैंपल लिया जो तीन दिन पहले भोजन नहीं कर रहीं थी। टीम के सदस्यों ने विशेष रूप से झील, तालाब, वन्यजीवों के पानी पीने के लिए बनाए गए हौज व पानी के एकत्र होने के अन्य स्थानों का निरीक्षण कर नमूने लिए। दूसरी टीम ने चिड़ियाघर के डाक्टरों से वन्यजीवों के खान-पान और इलाज की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। देर शाम तक टीम सैंपल लेकर रवाना हो गई। टीम अपनी रिपोर्ट केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को सौंपेंगी। चिड़ियाघर की निदेशक श्रद्धा यादव ने बताया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की टीम ने वन्यजीवों, पानी, मिट्टी के नमूने एकत्र करने के साथ अन्य जानकारियां भी जुटाई हैं।
चाकू व मांस काटने की लकड़ी की भी जांच
वैज्ञानिकों व चिकित्सकों की टीम ने मांसाहारी जीवों को भोजन देने के लिए बनाए गए मीट हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने मांस काटने में प्रयोग किए जाने वाले चाकू व लकड़ी से भी नमूने संग्रहित किए। वन्यजीवों को दिए जाने वाले भोजन की भी जांच की।