अस्पताल में जांच कमेटी को कई कमियां मिली थीं
इसके अलावा एक बिंदु को और तवज्जो दी गई कि तीन दिन में 47 लोगों के ऑपरेशन हुए, लेकिन सिर्फ उन्हीं छह लोगों की आंखों में संक्रमण हुआ। मरीजों के बयानों में भी साफ सफाई बरतने में लापरवाही को दर्ज किया गया था। इन्हीं सब को आधार बनाकर पुलिस ने जांच बंद करने का फैसला ले लिया। हालांकि अस्पताल में जांच कमेटी को कई कमियां मिली थीं। इनमें डॉ. नीरज गुप्ता का रोगियों की फॉलोअप जांच न करना और ओटी में सैनिटाइजेशन की कमी थी।
यह है मामला
पिछले साल दो नवंबर को बर्रा स्थित आराध्या आई हॉस्पिटल में एक आई कैंप का आयोजन किया गया। कैंप में दुर्गेश शुक्ला नाम का व्यक्ति शिवराजपुर व अन्य जगह से वाहनों के जरिये महिलाओं पुरुषों आदि को लेकर पहुंचा था। हालांकि 2 से 4 नवंबर के बीच चलने वाले इस कैंप के लिए स्वास्थ्य विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इस कैंप के लिए प्रति व्यक्ति 15-15 सौ रुपये भी लिए गए। कैंप के दौरान तीन दिन में मोतियाबिंद पीड़ित कुल 47 मरीजों का ऑपरेशन डॉ. नीरज गुप्ता ने किया। इसमें छह मरीजों की आंखों की रौशनी गई थी।
आंख के ऑपरेशन के बाद रोगियों के फॉलोअप में चूक हुई
आराध्या हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के रोगियों की आंख के ऑपरेशन के बाद फॉलोअप में चूक हुई। शिवराजपुर का जो एजेंट मोतियाबिंद के इन रोगियों की सर्जरी के लिए लाया था, वह 72 घंटे के अंदर दोबारा उन्हें दिखाने के लिए नहीं लाया। रोगियों की आंख की रोशनी जब चली गई तो वे शिकायत करने के लिए आए थे। यह बात खुद रोगियों ने हैलट के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को डायग्नोसिस करते वक्त बताई थी।
संक्रमण तो ठीक हुआ, लेकिन आंख की रोशनी नहीं आई
इसके बाद में उनका इलाज हैलट के नेत्र रोग विभाग में किया गया। रोगियों की आंखों का संक्रमण तो ठीक हो गया लेकिन आंख की रोशनी नहीं आई। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की नेत्र रोग विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि उस वक्त ओटी की जांच करा ली गई थी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने ओटी सैंपल की निगेटिव रिपोर्ट दी थी। इसके बाद जिस दिन रोगियों का ऑपरेशन हुआ था।
72 घंटे के अंदर रोगी का फॉलोअप जरूरी
उस दिन और भी रोगियों का ऑपरेशन हुआ था, उनकी भी रिपोर्ट ली गई थी। उन्हें संक्रमण नहीं था। रोगी के सर्जरी के बाद चले गए थे। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद 72 घंटे के अंदर रोगी का फॉलोअप जरूरी होता है। अमूमन रोगी को 48 घंटे में देखा जाता है। इससे अगर संक्रमण है तो तुरंत पता चल जाता है और उसका इलाज हो जाता है। रोगी सर्जरी के एक सप्ताह के बाद हैलट लाया गया था। धूल, मिट्टी और कीचड़ में भी सूडोमोनास बैक्टीरिया होता है। फॉलोअप हो जाने पर इलाज से संक्रमण ठीक हो जाता है।