विधानसभा चुनाव में इस बार सपा ने तीन सीटें भले ही जीत ली हों, लेकिन महज तीन साल पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में यह लड़ाई से बाहर थी। इस हिसाब से देखें तो भाजपा को एक सीट का नुकसान हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा आठ तो कांग्रेस दो विधानसभा सीटों पर बढ़त पर थी।
इस विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सात सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला। किदवईनगर सीट को छोड़ दें तो कांग्रेस कहीं भी दूसरे नंबर तक नहीं पहुंची। दरअसल, विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा के अलावा उसके विकल्प के तौर पर सिर्फ सपा, जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-बसपा को चुनौती मानकर अपने हिसाब से वोट किया।
मतदाताओं की धारणा ही ऐसी है कि लोकसभा चुनाव में वह भाजपा के विकल्प के रूप में कांग्रेस तो विधानसभा में सपा को देखने लगे हैं। करीब डेढ़ दशक से यह धारणा और मजबूत हुई है। आंकड़ों की बात करें तो लोकसभा चुनाव में जिले की 10 विधानसभा सीटों में से गोविंदनगर, सीसामऊ, कैंट, किदवईनगर और आर्यनगर में भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर थी।
घाटमपुर, बिठूर, बिल्हौर, कल्याणपुर और महाराजपुर में भाजपा के सामने बसपा चुनौती बनी रही। विधानसभा चुनाव में इसके उलट कांग्रेस सिर्फ किदवईनगर सीट पर भाजपा के सामने खड़ी हो सकी। इसके अलावा सभी सीटों पर सपा ने भाजपा को जबरदस्त टक्कर दी।
कुछ सीटों पर तो मतगणना के शुरुआती दौर में सपा प्रत्याशी बढ़त लेकर जीत की ओर बढ़ते दिखे। हालांकि, अंतिम दौर में बाजी पलट गई और भाजपा ने 2017 की सात सीटों पर जीत हासिल कर अपनी लाज बचा ली। पिछले चुनाव में एक सीट जीतने वाली कांग्रेस इस बार बसपा की ही तरह खाता भी नहीं खोल सकी और सपा के खाते में 2017 की तुलना में एक सीट बढ़कर तीन हो गई।